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बीकानेर,प्रमुख शासन सचिव (कृषि एवं उद्यानिकी ) मंजू राजपाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की भर्ती सहित विभिन्न समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की प्राथमिकता में है। कृषि विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं के साथ एसकेआरएयू स्थित कुल गुरु सभागार में बुधवार को चर्चा करते हुए राजपाल ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों के शोध अनुसंधान और तकनीक का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचे, इसके लिए कृषि विभाग तथा विश्वविद्यालयों को और समन्वित प्रयास करने होंगे। विश्वविद्यालयों में मानव संसाधन की कमी विचारणीय मुद्दा है, मात्र 20-25 प्रतिशत पद ही भरे हुए हैं, भर्ती, पेंशन सहित विश्वविद्यालयों की अन्य समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के समक्ष तथ्य रखें जाएंगे, जिससे इस संदर्भ में संवेदनशीलता के साथ शीघ्र निर्णय हो सके। राज्य सरकार के स्तर पर भर्ती की अनुमति से संबंधित कार्य प्राथमिकता से करवाए जाएंगे।
प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि प्रदेश में फसलों का व्यापक विविधीकरण है, बागवानी की भी बहुत संभावनाएं हैं, उत्पादकता व किसानों की आय बढ़ाने में मृदा स्वास्थ्य अहम है।
कृषि वैज्ञानिक तथा विभागीय अधिकारी किसानों को अधिकतम लाभ देने के लक्ष्य के साथ रोड मैप बनाकर कार्य करें। उन्होंने एक पंच गौरव योजना के तहत एक जिला एक उत्पाद योजना से विश्वविद्यालयों को जुड़ते हुए स्थानीय किसानों के हित में कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों को तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

*ग्राम में सक्रिय भागीदारी की अपील*

प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि कृषि विभाग के साथ मिलकर केवीके तथा कृषि वैज्ञानिक ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम)-2026 में सक्रिय भागीदारी निभाएं, जिससे किसानों को इस आयोजन का पूरा लाभ मिल सके।
*डॉ दुबे ने करवाया एसकेआरएयू की विभिन्न समस्याओं से अवगत*

बैठक में एसकेआरएयू के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ राजेंद्र बाबू दुबे ने विश्वविद्यालय की विभिन्न उपलब्धियों व समस्याओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित चने की गणगौर और मूमल वैरायटी देश के 25% क्षेत्र को कवर करती है । केवीके झूझनूं 70 लाख रुपए का बीज उत्पादन प्रतिवर्ष करता है । बीज उठाव की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने स्टेट सीड कॉरपोरेशन के साथ एमओयू करवाने की बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालय में रिक्त पदों , बकाया पेंशन भुगतान, औद्योगिक अपशिष्ट जल के एकत्र होने से विश्वविद्यालय की भूमि के ख़राब होने सहित विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी । डॉ दुबे ने बताया कि एसकेआरएयू में कुल 749 में से 290 पद भरे हुए हैं। वैज्ञानिकों के करीब 202 पद रिक्त है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा भर्ती की अनुमति मिलने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी, इस पर प्रमुख शासन सचिव ने शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करवाने की बात कही।
कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ विमला डुकवाल ने कहा कि मानव संसाधन में कमी विश्वविद्यालयों के समक्ष बड़ी समस्या है। उन्होंने राजकीय कृषि कॉलेजों में रिक्त पदों के कारण एफीलिएशन में आ रही समस्या से भी अवगत कराया। जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ वी एस जैतावत ने विश्वविद्यालय में पानी की समस्या तथा डेवलपमेंट के लिए राशि जारी करवाने की बात कही।
एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरु डॉ पीएस चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय के पेंशनर्स को पेंशन का पूरा लाभ मिले और पीएफ का बकाया पैसा समय पर जारी हो। एमपीयूटी उदयपुर के रजिस्ट्रार ने बताया कि विश्वविद्यालय में 80 प्रतिशत पद खाली होने से आइडेंटिटी क्राइसिस की स्थिति बन रही है ।
बैठक में अनुसंधान निदेशक एसकेआरएयू डॉ एनके शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान कृषि विभाग के जयदीप दोगने, मुकेश गहलोत, मंडी सचिव नवीन गोदारा सहित अन्य अधिकारी, वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

*खजूर परियोजना का निरीक्षण*
प्रमुख शासन सचिव ने एसकेआरएयू स्थित खजूर परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि
खजूर के टिशू कल्चर पौधों के साथ ऑफशूट से तैयार पौधों को भी लगाना चाहिए। खजूर का क्षेत्रफल बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए प्रमुख शासन सचिव ने खजूर के टिशू कल्चर पौधे तैयार करने पर और अधिक अनुसंधान के निर्देश दिए। खजूर परियोजना प्रभारी डॉ राजेंद्र सिंह राठौड़ ने परियोजना की जानकारी दी।

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