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बीकानेर,राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं कला को पांच दशकों से समर्पित प्रज्ञालय संस्थान द्वारा अपने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला में इस बार नवाचार करते हुए एक राजस्थानी डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म का भव्य प्रदर्शन लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में किया गया। इस फिल्म का प्रदर्शन विशेष तौर से नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने का उद्देश्य रहा। यह फिल्म राजस्थानी के वरिष्ठत्तम रचनाकार नागराज शर्मा को समर्पित है।
फिल्म के प्रदर्शन के बाद दूसरे सत्र में राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं कला को केन्द्र में रखकर एक विशेष परिसंवाद का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, रंगकर्मी एवं पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि हमें हमारी संस्कृति को संजोए रखना है, तभी हमारी मातृभाषा जीवित रह पाएगी। अन्यथा आज विश्व एवं भारतीय संदर्भ में कई भाषाएं विलुप्त हो चुकी है, एवं कई विलुप्त होने की स्थिति में है। आचार्य ने आगे कहा कि ऐसी फिल्म के माध्यम से विशेष तौर से नई पीढ़ी अपनी परंपरा, अपनी भाषा एवं संस्कृति से रूबरू होती है, तभी तो ऐसे आयोजन के लिए प्रज्ञालय जैसी संस्थान साधुवाद की पात्र है।
विशेष परिसंवाद कि अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ कवि-कथाकार एवं आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि हमें राजस्थानी भाषा की मान्यता के साथ-साथ हर स्तर पर सचेत रहकर अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति समर्पित भाव से जुड़े रहना होगा। इसी संदर्भ में नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा मंे राजस्थानी भाषा का पाठ्यक्रम अनिवार्य एवं व्यवहारिक रूप से पूरे प्रदेश में लागू होना चाहिए। तिवाड़ी ने आगे कहा कि ऐसे आयोजन से नई पीढ़ी निश्चय ही अपनी मातृभाषा एवं संस्कृति से और अधिक रूबरू होगी।
प्रारंभ में राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं एडवोकेट कमल रंगा ने मातृभाषा को व्यक्ति की अस्मिता और उसकी सांस्कृतिक पहचान बताते हुए नई पीढ़ी को भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व का अनुभव करना चाहिए और उसे अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
प्रारंभ में सभी का स्वागत करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने वीर धरा फिल्म की प्रस्तुति करने वाले निर्माता एवं निर्देशक अरविन्द चौधरी एवं उनकी टीम द्वारा एक अच्छी फिल्म बनाने पर आभार व्यक्त करते हुए सभी का स्वागत किया।
इस अवसर पर साहित्यकार प्रमोद शर्मा, बुलाकी शर्मा, राजेन्द्र जोशी, रेणु बाला चौहान, अलका चौधरी, गोपाल कुमार व्यास कुंठित, विशाल सोलंकी, अरविन्द चौधरी, गिरिराज पारीक, महेश उपाध्याय, घनश्याम ओझा, हरिनारायण आचार्य, आशीष रंगा, अशोक सैन ‘पप्पू जी’, मदन गोपाल व्यास ‘जैरी’, तोलाराम सारण, अख्तर अली, भवानी सिंह, महेन्द्र जोशी, अविनाश व्यास सहित अनेक युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि बालक/बालिकाओं ने फिल्म को देखा एवं परिसंवाद में अपनी वैचारिक एवं जिज्ञासा भरी बातों के साथ परिसंवाद में अपनी रचनात्मक भूमिका का निवर्हन किया।
फिल्म एवं परिसंवाद का संचालन गिरिराज पारीक ने किया एवं सभी का आभार अरविन्द चौधरी ने ज्ञापित किया।

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