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बीकानेर,जयपुर। संयुक्त अभिभावक संघ तत्वाधान में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत चयनित विद्यार्थियों को एक माह बाद भी स्कूलों में दाखिला नहीं मिलने से नाराज अभिभावक और विद्यार्थी सोमवार 4 मई को प्रातः 11 बजे से जेएलएन मार्ग स्थित शिक्षा संकुल के मुख्य द्वार पर विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघ ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी एवं शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते अभिभावक और विद्यार्थी ना केवल प्रताड़ना का शिकार हो रहे बल्कि मानसिक और आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे है।

संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने जानकारी देते हुए बताया कि* सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग द्वारा 12 मार्च 2026 को लॉटरी प्रक्रिया पूर्ण किए जाने के बावजूद आज दिनांक तक भी राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर के हजारों आरटीई प्रक्रिया में चयनित विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। निजी स्कूल संचालक लगातार अपनी हठधर्मिता का प्रदर्शन करते हुए दाखिले के लिए ना केवल अवैध रूप से खुलेआम फीस की मांग कर रहे है बल्कि कई निजी स्कूल संचालक कानून, अधिनियम, सरकार, विभाग और कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाकर स्पष्ट शब्दों में प्रवेश देने से इनकार कर रहे है साथ ही कई निजी स्कूल संचालक तो अभिभावकों को खुलेआम धमकी तक दे रहे है कह रहे है ” जो उखाड़ना है उखाड़ लो हम आरटीई में किसी भी विद्यार्थी को दाखिला नहीं देंगे, भले ही किसी को भी शिकायत दर्ज करवा दो “।

प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से प्रमुख रूप से निम्न मांगें राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से की जाएगी

1. RTE में चयनित सभी विद्यार्थियों का तत्काल प्रभाव से निजी स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।

2. अवैध फीस वसूली करने एवं प्रवेश से इनकार करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ी एवं त्वरित कार्यवाही की जाए।

3. RTE प्रक्रिया से जुड़े अभिभावकों को जानकारी व समाधान उपलब्ध कराने हेतु विशेष हेल्पलाइन डेस्क का गठन किया जाए।
4. अभिभावकों और विद्यार्थियों से अभद्र व्यवहार करने वाले प्रत्येक निजी स्कूल की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।
5. RTE राष्ट्रीय धरोहर और अधिनियम है इसका अपमान करने वाले प्रत्येक निजी स्कूल पर 25 लाख रु की पेनल्टी लगाई जाए।

अरविंद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि आरटीई में समस्या केवल इसी वर्ष की नहीं अपितु प्रत्येक वर्ष की है। निजी स्कूलों और शिक्षा विभाग की आपसी खींचतान का परिणाम हर साल अभिभावकों को भोगना पड़ता है और सजा मासूम बच्चों को दी जा रही है। अभिभावकों को पहले आवेदन करने के लिए ठोकरें खानी पड़ती है, जरूरी कागजात तैयार करवाने के लिए आर्थिक भार झेलना पड़ता है। उसके बाद लॉटरी निकलती है तो दाखिले के लिए दर दर भटकना पड़ता है। लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता। पिछले सत्र 2025-26 में भी 41 हजार से अधिक विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया गया। किंतु निजी स्कूल संचालक फीस की मांग हर साल करते है जबकि हर साल सरकार आरटीई के तहत रिजर्व फंड जारी करती है किंतु दाखिले कही भी नहीं मिलते जो ना केवल आरटीई प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है बल्कि प्रदेश के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। यह स्थिति शिक्षा के अधिकार जैसे संवैधानिक प्रावधानों का हनन कर रही है।

संयुक्त अभिभावक संघ ने सोमवार को अधिक से अधिक अभिभावकों और विद्यार्थियों को एकजुट और प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि ” बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के प्रत्येक अभिभावक को ना केवल जागरूक होना पड़ेगा बल्कि अभिभावकों की गाड़ी कमाई से स्कूलों का संचालन कर रहे इस सिंडिकेट को मुंहतोड़ जवाब देकर बताना होगा कि निजी स्कूलों का अस्तित्व अभिभावकों की कमाई पर टिका हुआ है, अगर सभी अभिभावकों ने एक साथ मिलकर निजी स्कूलों से किनारा कर लिया तो स्कूल माफियाओं के हाथों में भीख मांगने के लिए कटोरा भी नहीं बच पाएगा।

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