













बीकानेर, फल, सब्जी एवं मसाला फसलों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) मॉड्यूल तैयार करने हेतु गुरुवार को एसकेआरएयू में वैज्ञानिकों ने विस्तार से चर्चा की। टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस चर्चा में कृषि एवं बागवानी विभाग के अधिकारी तथा कृषि वैज्ञानिक शामिल हुए। एसकेआरएयू के
अनुसंधान निदेशक डॉ एन के शर्मा ने कहा कि फल, सब्जी एवं मसाला फसलों में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को संतुलित करने के लिए फसल-विशिष्ट आईपीएम मॉड्यूल विकसित करने होंगे, इसके लिए विस्तृत शोध की आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा एक विशेष शोध परियोजना स्वीकृत हो, जिसके माध्यम से किसानों को सटीक एवं प्रभावी पर्यावरण-अनुकूल कीट व्याधि प्रबंधन तकनीक उपलब्ध करवाई जा सकेगी, तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
सहायक निदेशक उद्यानिकी मुकेश गहलोत ने कहा कि किसानों के कल्याण हेतु विभाग तथा वैज्ञानिकों को समन्वित प्रयास करने होंगे ताकि सटीक तकनीकी जानकारी सीधे किसान तक पहुंचे।
बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि खेतों में रसायनिक उर्वरकों पर निर्भरता नियंत्रित रखने के लिए फसलों के प्राकृतिक मित्र कीटों एवं परजीवी जीवों के संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान देने की जरुरत है । साथ ही राइजोबियम, एजेटोबैक्टर जैसे जैव उर्वरकों, अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद एवं संतुलित उर्वरकों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग की अनुशंसा की गई।
फसल की आवश्यकता के अनुसार ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने, जैविक अथवा प्लास्टिक मल्च का उपयोग, प्रमाणित नर्सरियों से स्वस्थ पौध सामग्री लेने तथा मई-जून में सिंचित खेतों को 50 माइक्रोन मोटाई की प्लास्टिक शीट से 4–6 सप्ताह तक ढककर मृदा उपचार करने की सलाह दी गई। फलों की सुरक्षा के लिए बायोडिग्रेडेबल अथवा नॉन-वोवन बैग का उपयोग तथा नीम आधारित उत्पादों के प्रयोग की भी अनुशंसा की गई।
डॉ एच एल देशवाल ने कहा कि उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग फ़सल गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है साथ ही इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है। ऐसे में फ़सल विशेष पर आधारित अनुसंधान सटीक परिणाम दे सकेंगे।
*जिले में फल सब्जी उत्पादन क्षेत्र में लगातार वृद्धि*
गहलोत ने बताया कि जिले में 800 हैक्टेयर क्षेत्रफल में अनार, 350 हैक्टेयर में खजूर, 170 हैक्टेयर में नींबू वर्गीय फल, 125 हैक्टेयर क्षेत्रफल में बेर इत्यादि फल बगीचा स्थापित है। 3 हज़ार 650 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज एवं 4 हज़ार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में सब्जियों की खेती हो रही है। मसाला वर्गीय फसलों की 30 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में खेती हो रही है। उद्यानिकी विस्तार क्षेत्रफल को ध्यान में रखते हुए समन्वित कीट एवं व्याधि नियंत्रण मोडूयल अपनाकर किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे तथा निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ भूपेंद्र सिंह शेखावत , उपनिदेशक पेमाराम , डॉ विकास शर्मा, डॉ अशोक कुमार शाक्य, जगदीश मेघवंशी , डॉ बी डी एस नाथावत, डॉ सुशील कुमार, सी पी मीणा, अब्दुल अमीन सहित अन्य कृषि वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
