













बीकानेर,विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण, मानव स्वास्थ्य एवं सतत विकास विषयक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
आयोजन सचिव प्रो.आनंद खत्री ने बताया कि प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने अपने संबोधन में पर्यावरण पर विकिरण (Radiation) के प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अनियंत्रित विकिरण के स्रोत पर्यावरणीय संतुलन तथा जीव-जंतुओं एवं मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न कर सकते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।
प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण पृथ्वी पर विद्यमान समस्त जीवन रूपों की आधारशिला है। उन्होंने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए ऊर्जा संरक्षण, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
डॉ. कृति शर्मा ने वर्तमान पर्यावरणीय समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए मानव स्वास्थ्य पर प्रदूषकों के दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बढ़ता प्रदूषण अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है और इसके नियंत्रण हेतु सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
डॉ. राजेश भाकर ने पर्यावरण संरक्षण में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीकों की उपयोगिता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि GIS तकनीक जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डॉ. राजेश धूरिया ने “वन हेल्थ” (One Health) की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए मानव, पशु एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए इन तीनों घटकों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
डॉ. दिग्विजय सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं पर्यावरण संरक्षण के संबंध पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन परंपराएं प्रकृति के अनुकूल रही हैं तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली सभी जीवों के संरक्षण और सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
सहायक निदेशक डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत की प्राचीन पर्यावरण-अनुकूल परंपराओं एवं जीवन मूल्यों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की भारतीय परंपराएं आज भी पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
आयोजन सह सचिव डॉ.अर्चना पुरोहित ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा स्वच्छ एवं हरित वातावरण के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प लिया।
