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बीकानेर,भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बीकानेर में ‘सहजन आधारित कृषि प्रणाली’ विषय पर तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों को सहजन (मोरिंगा) आधारित कृषि प्रणाली अपनाकर सतत एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सहजन (मोरिंगा) एक बहुउपयोगी एवं अत्यंत लाभकारी वृक्ष है, जिसके बीज, पत्तियां, जड़, तना, छाल तथा लकड़ी का उपयोग खाद्य, औषधि, कृषि, पशुपालन, जल शोधन तथा विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में सहजन आधारित कृषि प्रणाली किसानों के लिए आय एवं पोषण सुरक्षा का सशक्त माध्यम बन सकती है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि मोरिंगा की पत्तियां पशु आहार के रूप में भी उपयोगी हैं, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ दूध एवं मांस उत्पादन में भी वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों से सहजन के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने का आह्वान करते हुए कहा कि इसके विभिन्न उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने मोरिंगा के औषधीय गुणों पर भी प्रकाश डाला और इसे भविष्य की महत्वपूर्ण कृषि फसल बताया।

काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि यह परियोजना बीकानेर जिले के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। उन्होंने किसानों से सहजन आधारित कृषि प्रणाली अपनाकर आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मोरिंगा एक बहुउद्देशीय पौधा है, जिसका उपयोग भोजन एवं औषधि दोनों रूपों में किया जाता है। यह अत्यधिक पौष्टिक होने के साथ-साथ अधिक बायोमास उत्पादन की क्षमता भी रखता है।

कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक डॉ. वीरबल ने बताया कि इस प्रशिक्षण में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 25 किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के उपरांत प्रत्येक प्रतिभागी किसान को 100 सहजन के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत अब तक जिले के 500 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है तथा इच्छुक किसानों को पौध वितरण भी किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को सहजन की उन्नत खेती, पौध उत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं विपणन संबंधी व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।प्रशिक्षण कार्यक्रम में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज गोरा एवं डॉ. सीताराम जाट ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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