














बीकानेर,अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी म.सा. ने छबीली घाटी के सेवा सदन में 4 सितम्बर 2026 को भगवती दीक्षा ग्रहण वाली चारित्र आत्माओं को रविवार को चतुर्विद संघ की साक्षी में बड़ी दीक्षा देकर पांच महाव्रत धारण करते हुए संयम मार्ग आगे बढ़ने का मंगल आशीर्वाद दिया।
आचार्यश्री व उपाध्याय प्रवर के सान्निध्य में देशनोक मूल के बैगलूर निवासी मुमुक्षु नवरतन कोठारी नवदीक्षित रामनव मुनि, पाली के मुमुक्षु शुभम श्रीश्रीमाल राम शुभम मुनि व छतीसगढ़ की मुमुक्षु काजल नाहर साध्वी राम कंजम श्रीजी व गंगाशहर निवासी सूरत प्रवासी मुमुक्षु दिया सुराणा साध्वी राम दिव्यम् श्रीजी बनी थी। चारों चारित्र आत्माओं के दृढ संकल्प, देव, गुरु तथा परिजनों के आशीर्वाद व प्रेरणा से बड़ी दीक्षा के बाद पूर्ण रूप से मुनि व साध्वी म.सा. बन गए। आचार्य श्री ने युवाचार्य बनने के बाद 494 में मुमुक्षुओं को मुनि व साध्वी की दीक्षा दे चुके है। साधुमार्गी संघ हुक्म गच्छ में बड़ी दीक्षा के बाद वर्तमान में 96 संत मुरिाज व 549 साध्वी सतियां जी है।
पर्युषण पर्व है बंदे कुछ आत्म हित चिंतन करले-आचार्यश्री रामलालजीम.सा. ने ’’चेतना भजन का मुखड़ा ’’पर्युषण पर्व है बंद कुछ आत्म हित चिंतन करले’’ सुनाते हुए कहा कि कहा कि सांसारिकता के मायाजाल में वशीभूत होकर व्यर्थ विचार करते है, आत्म चिंतन नहीं करते। पर्युषण पर्व में विभिन्न तरह के चारित्र आत्माओं के दृष्टांत, मुनि-साध्वीवृंद के दर्शन वंदन, नित नए व्याख्यान, जप, तप, धार्मिक-आध्यात्मिक क्रियाएं आत्म चिंतन, आत्म जागृति कल्याण की प्रेरणा देती है। पांच महाव्रत सत्य, अहिंसा, अचौर्य, अपरिग्रह व ब्रह््मचर्य, संयम का पालन करने वाली आत्माएं ही कल्याण के मार्ग पर बढ़ती है। प्रतिदिन आत्मा के हित-अहित का चिंतन करें । काम,क्रोध, लोभ व मोह आदि कषायों, हिंसा से आत्मा का अहित होता है। पर्युषण पर्व आत्म नियंत्रण, आत्म हित का पर्व है। आत्मा में सांसारिक भोग विलास का आवरण चढ़ा होने के कारण प्रतिक्रमण आदि आत्म हित की क्रियाएं सार्थक परिणाम नहीं देती, साधक का आत्महित नहीं होता ।
उन्होंने अपने गुरु आचार्य नानालाल जी म.सा. का स्मरण करते हुए कहा कि ’’ कलयुग में संत अनेक हुए मेरे नाना गुरु का क्या कहना, वो समा गए हर जन मन में, ऐसे गुरु का क्या कहना’’ सुनाते हुए कहा कि आचार्यश्री ने कठिन परिस्थितियों में समता भाव के साथ देव, गुरु व धर्म के प्रति समर्पण रखते हुए संयम साधना की तथा संघ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
आचार्यश्री ने चार चारित्र आत्माओं की बड़ी दीक्षा के प्रसंग में कहा कि राग, द्वेष, मोह माया व्यक्ति को हिंसा व पतन के मार्ग पर ले जाती है। राग-द्वेष, कषायों को त्याग कर पांच महाव्रत धारण करते हुए आत्मा को पवित्र बनाने के लक्ष्य को लेकर वैराग्य की ओर मुड़ना क्रांति है। उन्होंने कहा कि जो बीत गया उसे भूल जाइए, आज से ही आत्म कल्याण, आत्म उद्धार के लक्ष्य को लेकर साधना, आराधना व भक्ति करें। आत्मा परमात्म स्वरूप् है, निगोद व सूक्ष्म निगोद में रहने वाली सभी आत्माओं का स्वरूप एक समान है। कर्मों व कषायों के कारण उनमें भिन्नता व्याप्त है। अहिंसा, संयम की ताकत को अपने जीवन में साक्षात करें।
अधर्मों का मूल कारण ब्रह्मचर्य-उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने प्रवचन में कहा कि अनेक अधर्मों का मूल कारण ब्रह्मचर्य का अभाव है। ब्रह्मचर्य का अभाव इह व पर भव को भी भी प्रभावित करता है। आगमों में ब्रह्मचर्य पालन कर सूली से सिंहासन बनाने वाले सहित अनेक उदाहरण है। ब्रह्मचर्य की शक्ति अलौकिक है। अर्जुन ने ब्रह्मचर्य के तेज से कौरवों की सेना को परास्त किया। ब्रह्मचर्य से भीतर में निर्भयता आती है। ब्रह्मचर्य के प्रदीप्त होने से उच्चता के साथ जप,तप, संयम, अहिंसा की साधना सार्थक होती है तथा जीवन में उर्जा व शक्ति मिलती है। ब्रह्मचर्य जीवन की वह संहिता है जो जीव को आत्म साक्षात्कार और मोक्ष की ओर ले जाती है। ब्रह्मचर्य आंतरिक उर्जा को वासना से हटाकर उपासना और आत्म कल्याण में लगाता है। ब्रह्मचर्य उत्कर्ष धार्मिक आध्यात्मिक चेतना, स्मरण शक्ति की तीक्षणता को बढाता है तथा कर्मों की निर्जरा करता है।
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महापर्व पर्युषण पर पार्श्वचंद्र गच्छ उपासरे में भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव
बीकानेर, 13 सितम्बर। श्री पार्श्वचन्द्र सूरि गच्छ जैन संघ के आसानियों के चौक के रामपुरिया के बड़े उपासरे में पर्युषण महापर्व में भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव भक्ति भाव से साध्वी पदम प्रभा व वयोवृद्ध साध्वी सुव्रता श्रीजी के सान्निध्य में मनाया गया । भगवान महावीर स्वामी के जन्म के गीत गाए गए तथा जयकारे लगाए गए। कांसी की थाली बजाकर वीर प्रभु के जन्म की बधाइयां दी गई।
वयोवृद्ध साध्वी सुव्रता श्रीजी ने भगवान महावीर स्वामी की माता त्रिशला देवी को स्वप्न में दिखाई दी वस्तुओं का वर्णन किया तथा कल्पसूत्र के अनुसार उनके जन्म के वार तिथि की उद्घोषणा की। भगवान महावीर के बाल रूप् को पालने में झुलाया गया तथा अक्षत की वर्षा कर मंगल कामना की गई।
श्री पार्श्वचंद्र सूरि गच्छ जैन संघ के अध्यक्ष रवीन्द्र रामपुरिया ने बताया कि पालने के लाभार्थी मूलचंद-नवरतन बांठिया परिवार के निवास बांठिया चौक से आसानियों के चौक तक गाजे बाजे के साथ श्रमण भगवान महावीर के पालने को लाया गया। बैंड पार्टी नवंकार महामंत्र की धुन बजा रही थी वहीं महिलाएं मंगल गीत गा रहीं थी। भगवान के जन्मोत्सव के समय पूरा उपासरा श्रावक-श्राविकाओं से खचाखच भरा था।
श्री पार्श्वचंद्र सूरि गच्छ जैन संघ के मंत्री प्रताप रामपुरिया ने बताया उपासरे के पास के ही भगवान महावीर स्वामी के मंदिर में विशेष पूजा की गई तथा भक्ति का आयोजन हुआ। चैत्य परिपाटी लाभ लाभ प्रकाश चंद, राजेश, मनीष राखेचा परिवार ने लिया है। वहीं त्रिशला माता की माता को स्वप्न में दिखाई दी 14 चीजों यथा हाथी, वृषभ, सिंह, लक्ष्मी,पुष्पमाला, चन्द्र, सूर्य, ध्वजा, कलश, पदम सरोवर, समुद्र,देव विमान, रत्न राशि व निर्धूम अग्नि की बोलिया लगाई गई। बोलियों के दौरान पार्श्व महिला मंडल व पप्पूजी बांठिया आदि ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए।
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मन मंदिर व शांति विहार सोसायटी में गणेशोत्सव आज
बीकानेर, 12 सितम्बर। खतुरिया कॉलोनी के मन मंदिर में गणेश चतुर्थी पर सोमवार को गणेश उत्सव मनाया जाएगा। भगवान गणेश की स्तुति-वंदना, भक्ति तथा विशेष पूजन व श्रृंगार सहित विविध आयोजन होंगे। गणेशोत्सव की तैयारियां रविवार को ही पूर्ण करली गई। मंदिर में विशेष सजावट की गई है।
मंदिर के संस्थापक सुरेश गुप्ता ने बताया कि शिवबाड़ी के लालेश्वर महादेव मंदिर के अधिष्ठाता स्वामी विमर्शानंद गिरि की प्रेरणा व आशीर्वाद से आयोजित गणेश चतुर्थी महोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष सजावट की गई है।
पवनपुरी की शांति विहार सोसायटी में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल राय व दंत रोग विशेषज्ञ डॉ.सोनम राय के नेतृत्व में भगवान गणेश का उत्सव 14 सितंबर को अभिजीत मुर्हू में मनाया जाएगा। विशेष पूजन बनारस के वेदपाठी ब्राह्मणों नेतृत्व में किया जाएगा। बनारस से ही भगवान गणपति की विशेष प्रतिमा मंगवाई गई है। शांति विहार सोसायटी की महिला विंग की वरिष्ठ सदस्य, शिक्षाविद् अलका डॉली पाठक ने बताया कि उत्सव में भागीदारी के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
