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बीकानेर। मलंग फोक फाउंडेशन द्वारा गंगाशहर स्थित सेंटर फॉर लाइफ, धरम सज्जन ट्रस्ट में आयोजित की जा रही “मैपिंग कल्चर्स” शीर्षक से प्रख्यात फोटोग्राफर एलिज़ाबेथ सिम्सन (1931–2025) की फोटोग्राफी प्रदर्शनी में अब तक 200 से अधिक कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों ने अवलोकन किया है. विद्यार्थियों के अलावा बड़ी संख्या में युवाओं, स्कॉलर, शोध विद्यार्थी, फोटोग्राफर और आमजन भी रुचि दिखा रहे हैं. प्रदर्शनी के अवलोकन के लिए आए दर्शकों ने प्रदर्शनी के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनी में विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के वस्त्र, लोक संगीत, कारीगरी और जनजीवन की झलक देखने को मिली, जो आज के बदलते समय में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संदर्भ प्रस्तुत करती है। यह आयोजन न केवल अतीत की स्मृतियों को सहेजने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है। प्रदर्शनी 10 मई 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 7:00 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी।

मलंग फोक फाउंडेशन के निदेशक गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि प्रदर्शनी के अवलोकन के लिए वनस्थली विद्यापीठ से शोध विद्यार्थी, बी जे एस रामपुरिया कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ़ फाइन आर्ट के छात्रों के अलावा शिक्षक अनिकेत कछावा, शंकर रॉय, शिक्षाविद गिरिराज खेरीवाल, कोषाधिकारी धीरज जोशी, जनसंपर्क अधिकारी हरिशंकर आचार्य, प्रख्यात चित्रकार पृथ्वी के अलावा अनेक लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया.

एलिज़ाबेथ सिम्सन द्वारा पिछले कई दशकों में राजस्थान और गुजरात के विभिन्न हिस्सों में किए गए यात्राओं के दौरान लिए गए ये चित्र केवल दृश्य दस्तावेज़ नहीं हैं, बल्कि समय के साथ बदलते समाज, जीवन-शैली और सांस्कृतिक परंपराओं के जीवंत साक्ष्य भी हैं। उनकी दृष्टि में ग्रामीण जीवन, लोक कलाएँ, वस्त्र परंपराएँ और मानवीय भावनाएँ एक विशेष संवेदनशीलता और गहराई के साथ उभरकर सामने आती हैं।
प्रदर्शनी में बायोस्कोप बन रहा आकर्षण का केंद्र 

मलंग फोक फाउंडेशन द्वारा प्रदर्शनी में आम जन के लिए प्राचीन समय में गांव में मनोरंजन का साधन रहे बायोस्कोप को भी प्रदर्शित किया गया है जिसमे बीकानेर की 50 साल से भी अधिक पुराने फोटो को दिखाया जा रहा है। प्रदर्शनी में आने वाला हर व्यक्ति बायोस्कोप को देखकर अपने बचपन की यादें ताजा कर रहा है।

फाउंडेशन द्वारा शहर के सभी कला-प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आमजन से आग्रह किया गया है कि वे इस प्रदर्शनी में पधारकर इस अनूठे अनुभव का हिस्सा बनें.

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