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बीकानेर,आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार करने का “कॉफी विद कुलगुरु” उत्कृष्ट उदाहरण। राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर द्वारा आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का नवाचार “कॉफ़ी विद कुलगुरु” कार्यक्रम राजस्थान राज्य एक प्रेरणादायक पहल के रूप में उभरकर सामने आया। आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों में आत्मविश्वास को बढ़ाने के उदेश्य से आयोजित इस नवाचार ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब संवाद के दरवाज़े खुलते हैं, तो विकास और नवाचार की राह स्वतः प्रशस्त होती है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता और संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित “कॉफी विद कुलगुरु” कार्यक्रम आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायी मंच बनकर उभरा है। कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर की यह पहल आदिवासी विद्यार्थियों के लिए अवसरों के नवीन द्वार खोल रही है और उन्हें उच्च शिक्षा के साथ आत्मविश्वास पूर्वक जोड़ रही है। निश्चित रूप से यह कार्यक्रम आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में सम्पूर्ण प्रदेश में सकारात्मक बदलाव की प्रेरक मिसाल बनेगा यह अभिनव पहल न केवल विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय प्रशासन से सीधे जोड़ रही है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास, मार्गदर्शन और नई संभावनाओं का संचार भी कर रही है। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, विशेषकर आदिवासी वर्ग के छात्रों के लिए एक नई प्रेरणा और मार्गदर्शन का द्वार खोला है। इस अनौपचारिक संवाद कार्यक्रम के माध्यम से कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने सीधे विद्यार्थियों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं, चुनौतियों और आकांक्षाओं को समझा। इस कार्यक्रम ने संवाद, सहभागिता और नवाचार की एक नई मिसाल कायम की है। यह पहल विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रशासन के बीच सीधे संवाद का एक प्रभावी मंच के रूप में विकसित हुई है। गौतरलब हैं कि राजस्थान के कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागड़े जी एवं प्रदेश में जनजातीय शिक्षा के उन्नयन हेतु राज्य सरकार की संकल्पना को साकार करते हुए गोविन्द गुरु विवि कुलगुरु प्रो केशव सिंह ठाकुर के सफल निर्देशन में विशेषकर आदिवासी एवं सर्व वर्ग के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा में समान अवसर प्रदान करने की प्रतिबद्धता के साथ नित्य नए आयाम स्थापित कर उच्च शिक्षा की जन कल्याणकारी नीतियों का सफल क्रियान्वयन कर रहा हैं।

विद्यार्थियों के साथ हुए इस प्रत्यक्ष संवाद में कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर उनकी व्यवहारिक समस्याओं पर चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को सीधे सुनना तथा उनके समाधान की दिशा में ठोस पहल करना रहा था । कुलगुरु ने प्रतिभागियों की बातों को गंभीरता से सुना और उन्होंने विद्यार्थियों को अपने विचार खुलकर रखने और विश्वविद्यालय के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए भी प्रेरित किया। कुलगुरु प्रो ठाकुर के नवाचार “कॉफी विद कुलपति” कार्यक्रम ने पारंपरिक औपचारिक बैठकों से हटकर हितधारको के साथ प्रभावी और परिणामोन्मुख संवाद स्थापित किया। वही विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा करते इस पहल की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की संवेदनशीलता- पारदर्शिता और विश्वविद्यालय -हितधारकों के मध्य सशक्त संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में आदिवासी विद्यार्थियों ने खुलकर अपने विचार रखे और शिक्षा से जुड़ी बाधाओं पर चर्चा की। कुलगुरु प्रो केशव सिंह ठाकुर ने उन्हें उच्च शिक्षा के महत्व, उपलब्ध अवसरों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय हर संभव सहयोग प्रदान करेगा, ताकि कोई भी विद्यार्थी संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए। इस पहल का सकारात्मक प्रभाव यह रहा कि कई आदिवासी छात्र-छात्राएं अब आत्मविश्वास के साथ उच्च शिक्षा की मुख्यधारा में जुड़ने के लिए अधिकाधिक प्रेरित हुए हैं।

“कॉफी विद कुलगुरु” न केवल संवाद का मंच बना, बल्कि यह सामाजिक समावेशन और शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। कुलगुरु प्रो केशव सिंह ठाकुर की प्रेरणा से इस प्रकार के संवाद सत्र भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि विश्वविद्यालय में सहभागिता, विश्वास और नवाचार की संस्कृति को और अधिक मजबूत किया जा सके। इस संवाद सत्र में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोध के अवसर, कैरियर मार्गदर्शन और कैंपस सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर बातचीत की गयी। इस संवाद ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और उनके विश्वविद्यालय से जुड़ाव की भावना को और मजबूत किया हैं। एक प्रेरणादायक पहल के रूप में इस संवाद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। विश्वविद्यालय की यह पहल आने वाले समय में और भी व्यापक स्तर पर सफलता की नई कहानियाँ लिखेगी।

संवाद से सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले अनेक विद्यार्थी अक्सर संसाधनों, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास की कमी के कारण उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से स्वयं को दूर महसूस करते हैं। ऐसे में “कॉफी विद कुलगुरु” कार्यक्रम उनके लिए एक खुला संवाद मंच प्रदान कर रहा है, जहाँ वे कुलगुरु से सीधे संवाद कर अपनी समस्या, आकांक्षाएँ और शैक्षिक चुनौतियां साझा कर सकते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को कैरियर निर्माण, शोध, नवाचार और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर भी प्रेरक मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

*शिक्षा में समान अवसरों का विस्तार*

“कॉफी विद कुलगुरु” कार्यक्रम आदिवासी विद्यार्थियों को यह विश्वास दिलाने में सफल रहा है कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि उनके सपनों को साकार करने का सशक्त माध्यम भी है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं, कौशल विकास, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों और आधुनिक शिक्षा संसाधनों से अवगत कराया जाता है। इससे आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों में उच्च शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है और वे अधिक संख्या में मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

*प्रेरणा, सहभागिता और विश्वास का संगम*

यह कार्यक्रम विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विश्वास का वातावरण निर्मित कर रहा है। कॉफी के सहज माहौल में आयोजित यह संवाद विद्यार्थियों की झिझक को कम कर रहा है और उन्हें खुलकर अपने विचार रखने का अवसर देता है। यही कारण है कि यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक परिवर्तन का माध्यम बनती जा रही है।

भविष्य की दिशा

कॉफी विद कुलगुरु जैसी पहले भारत के शिक्षा तंत्र में समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और समाज में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार करने में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। “कॉफी विद कुलगुरु” कार्यक्रम शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

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