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बीकानेर,बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय में “एडवांसेस इन इन्फॉर्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड कंप्यूटिंग” विषय पर दो दिवसीय छठी अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। आयोजन के आर्गेनाइजिंग चेयर डॉ. विशाल गोड ने बताया कि इराक, घाना, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, त्रिनिदाद एवं टोबैगो सहित 12 से अधिक देशों से 600 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से कठोर अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यू प्रक्रिया के उपरांत केवल 90 उच्च-गुणवत्ता शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण हेतु चयन किया गया।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु प्रो. सुमंत व्यास ने कहा कि तकनीक का वास्तविक महत्व तभी है जब वह स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करे और शोध को जमीनी स्तर पर लागू किया जाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पशु विज्ञान, कृषि और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक का समावेश अत्यंत आवश्यक है, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंच सके l

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने स्पष्ट किया कि शोध का उद्देश्य केवल प्रकाशन नहीं, बल्कि समाज को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाना होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए जो उद्योग और समाज दोनों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि गुणवत्तापूर्ण शोध और नवाचार ही किसी भी शैक्षणिक संस्थान की वास्तविक पहचान होते हैं।

कार्यक्रम विशिष्ट अतिथि निदेशक, जी आर फाउंडेशन डॉ. अमित जोशी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सिंगुलैरिटी और सूचना प्रौद्योगिकी के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निरंतर सीखना ही बदलते तकनीकी दौर में सफलता की कुंजी है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में मानव और मशीन के बीच समन्वय नई संभावनाओं को जन्म देगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेंगे। युवाओं को इन उभरती तकनीकों के प्रति सजग और तैयार रहना होगा।

कॉन्फ्रेंस के जनरल चेयर डॉ. मनोज कुड़ी ने बताया कि दो दिनों में कुल 14 सत्र आयोजित किए जाएंगे। पहले दिन तीन सत्रों में 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों की अध्यक्षता डॉ. नोनिता शर्मा (IGTU, दिल्ली), डॉ. झलक ठक्कर (NFSU, गांधीनगर), डॉ. निरव मेहता (पारुल यूनिवर्सिटी, वडोदरा) एवं डॉ. संजय गौड़ (जोधपुर) ने की। उद्घाटन समारोह में इराक की रेपानियन यूनिवर्सिटी की प्रो. पाईमन अहमद ने भी वैश्विक सहयोग और ज्ञान-विनिमय पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ममता शर्मा पारीक ने किया।

*क्या होंगे इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लाभ*
इस कॉन्फ्रेंस से बीटीयू के विद्यार्थियों को वैश्विक शोध, नवीन तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित होंगे, जिससे बीकानेर में जल प्रबंधन, कृषि और डिजिटल सेवाओं में सुधार संभव है। साथ ही, यह आयोजन नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

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