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बीकानेर,राजस्थान सरकार की राज्य के बीकानेर सहित हर जिले में विकास और जन कल्याण की 129 योजनाएं तो चल रही है। कुछ विभागों की इसके अलावा भी योजनाएं हैं। इसी तरह बीकानेर में केन्द्र प्रवर्तित 61 योजनाओं पर काम चल रहा है। केन्द्र और राज्य सरकार की इन योजनाओं से इतर बीकानेर के विकास में जरूरत के हिसाब से जनता की भी कई तरह के विकास कार्य की प्राथमिकताएं सरकार और जन प्रतिनिधियों के समक्ष उठाई जाती रही है। विभिन्न स्तरों पर जनता की इन प्राथमिकताओं को वाजिब माना जा रहा है, परन्तु इन पर ज्यादा कुछ हुआ नहीं है। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (‘दिशा’) की बैठक में केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर में विकास के कई नए परचम फहराएं है। वहीं जनता की मांगों में से एक मांग हैलीपैड का 24 हैक्टेयर में विस्तार और बीकानेर के एयरपोर्ट को जल्दी ही वृहद् रूप देने की बात कही है। उनका कहना है कि इसके लिए उच्च स्तर पर सभी तैयारियां कर ली गई है। आने वाले समय में बीकानेर से लम्बी दूरी की हवाई सेवाएं उपलब्ध हो पाएंगी।

केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान में कैबीनेट मंत्री सुमित गोदारा और विधायकों (डा. विश्वनाथ, सिध्दी कुमारी, जैठानंद व्यास, तारा चंद सारस्वत और अंशुमान सिंह भाटी) को जनता की वे प्राथमिकताएं जो सरकारी योजना में शामिल नहीं है कि भी समीक्षा करनी चाहिए। बीकानेर के लोगों की राज्य सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मांग रही है कि मोठ की खेती को संवर्धित करे, किसानों को ऐसा सीड दे कि मोठ की पैदावार बढ़े। फाइलों के लिये एकल खिड़की योजना को सुदृढ़ बनाया जाएँ। जिस बीकानेर का नाम बिजली उत्पादन में शीर्ष पर लिया जाता है, उसी बीकानेर में देश की सबसे ज्यादा महंगी बिजली यहां के व्यापारियो को दी जाती है। ड्राइ पोर्ट, मेगा फूड पार्क और रिंग रोड की जरूरत है। पोर्ट पर आने वाले मेटेरियल की क्लीयरेंस की सुविधा हो। सर्टिफाइड NABL लैब की जरुरत है। माइनिंग को इंडस्ट्री का दर्जा दिया जाए। सोलर से उत्पादित बिजली के लिये पहले सरकारों ने कहा था कि हम 3 रुपये की यूनिट से बिजली वापस ले लेंगे, अब मना कर रही है।. बीकानेर में एक्सपोर्ट का हब डेवलेप किया जाये। पर्वतीय क्षेत्रों की तरफ प. राजस्थान में भी रेगिस्तान में लगने वाले उद्योगों में 10 सालों तक कर की छूट दें, ऐसा करने से बीकानेर में इतने रोजगार आएंगे कि कल्पना नहीं की जा सकती। राज्य कल्याण बोर्ड बनाए जाए। मजदूरों के माइग्रेशन के लिये सरकार कोई सरल प्रावधान बनाए, ताकि यहां ज्यादा से ज्यादा मजदूर आ सकें। ऊन के ज्ञान की तकनीकी पढ़ाई करवाई जाये। बीकानेर से सिरेमिक क्ले का मूल्य 300 रुपये/ टन होता है लेकिन उसी क्ले के प्रॉडक्ट्स बनाकर गुजरात उसे 12000/टन के हिसाब से बेचती है..ऐसे में अगर यहां पर सेरेमिक के प्रॉडक्ट बनाने सिखाये जायें ताकि क्ले के ज्यादा रुपये मिल सकें। सोलर एनर्जी के लिये पॉलिसी को मोडिफाई करने की जरुरत कलस्टर बनाकर यहां पर प्रिंटिंग उद्योग को विकसित किया जाये। बीकानेर के नाम से जड़ाऊ बिकती है, उसके लिये भी क्लस्टर बनाकर उद्योग विकसित किये जायें। पोटाश के खनन से भी बीकानेर की कायापलट हो सकती है। हेंडीक्राफ्ट को लेकर भी यहां पर क्लस्टर हब बनाया जाये.. क्योंकि ये बनाते हम हैं लेकिन बेचता कोई और है। ये सभी मुद्दे बीकानेर विकास की प्राथमिकताएं हैं, परन्तु सरकार की योजनाओं का हिस्सा नहीं है। जन प्रतिनिधि भी इन मुद्दों पर निस्तारण की पहल नहीं कर रहे हैं।
केन्द्रीय मंत्री ने ‘दिशा’ की इस बैठक में बताया कि यूनाइटेड नेशन्स ने वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय चारागाह एवं पशुपालक वर्ष के रूप में मनाया जाना निश्चित किया है। वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से बीकानेर को ग्रासलैंड और चारागाह विकास के लिए चयन किया है। यह बात दिगर है कि चालू वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही चल रही है। जिले में अभी तक इस घोषणा पर कोई हलचल ही नहीं है। पहले भी बीकानेर में केन्द्रीय कृषि वि.वि. खोलने की सैध्दान्तिक सहमति दी गई थी अभी तक नहीं खुला है। इसी तरह अब केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि खेल मंत्रालय की ओर से बीकानेर में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोले जाने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। नाइट टूरिज्म विकास के तहत पूगल क्षेत्र में स्टार गेजिंग एरिया विकसित करने की दिशा में अब तक की कार्यवाही की जानकारी दी। नीति आयोग की ओर से प्रस्तावित रि-साइकिल जोन बनाने के बारे में बताया। बैठक में केन्द्रीय मंत्री ने विधायकों और अधिकारियों के समक्ष उक्त पांच तोहफे बीकानेर को दिए हैं। केन्द्रीय मंत्री मेघवाल जनता के प्रस्तावों को भी इन तोहफों में शामिल करें तो बीकानेर के विकास को गति मिलेंगी।

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