













बीकानेर,बीकानेर स्थित प्राचीन केसरिया हनुमान मंदिर के 82वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य रामकथा महोत्सव में शुक्रवार को अत्यंत मार्मिक, प्रेरणादायक एवं भक्तिमय प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रीराम-वाल्मीकि संवाद, महाराज दशरथ के देहावसान, भरत चरित्र तथा श्रीभरत जी द्वारा प्रभु श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या आगमन का भावपूर्ण चित्रण किया गया, जिसे सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
रामकथा वाचन कर रहे पंडित केशव शुक्ला ने श्रीराम एवं महर्षि वाल्मीकि के दिव्य संवाद का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि वनवास काल में जब प्रभु श्रीराम महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पहुंचे, तब दोनों के मध्य धर्म, मर्यादा एवं लोककल्याण को लेकर गहन संवाद हुआ। इस प्रसंग से श्रद्धालुओं को सत्य, त्याग और आदर्श जीवन का संदेश प्राप्त हुआ।
इसके पश्चात कथा में महाराज दशरथ के वियोग का अत्यंत करुण प्रसंग सुनाया गया। प्रभु श्रीराम के वनगमन के दुख में महाराज दशरथ द्वारा प्राण त्यागने का वर्णन सुनते ही कथा पंडाल में सन्नाटा छा गया और अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। उपस्थित भक्तजन पिता-पुत्र के प्रेम और मर्यादा को स्मरण कर भावुक हो उठे।
आज की कथा का मुख्य आकर्षण भरत चरित्र रहा। पंडित जी ने बताया कि जब भरत जी को अयोध्या लौटने पर समस्त घटनाओं का ज्ञान हुआ तो उन्होंने माता कैकई को कठोर वचन कहे और प्रभु श्रीराम को वापस लाने के लिए वन की ओर प्रस्थान किया। भरत जी का भाई प्रेम, त्याग, धर्मनिष्ठा और प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण सुन श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा में आगे श्रीभरत जी द्वारा प्रभु श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटने का प्रसंग सुनाया गया। भरत जी ने स्वयं सिंहासन स्वीकार करने से इंकार करते हुए प्रभु श्रीराम की पादुकाओं को राजगद्दी पर विराजमान किया तथा सेवक भाव से राज्य संचालन का संकल्प लिया। यह प्रसंग सुनते ही श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और भरत जी महाराज के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध भजन “राम भक्त ले चला रे, राम की निशानी” का भावपूर्ण गायन किया गया, जिसने कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भजन के दौरान अनेक श्रद्धालु झूम उठे और पूरा वातावरण राममय हो गया।
कथा वाचन कर रहे पंडित केशव शुक्ला भी कई प्रसंगों पर भावुक हो उठे और उनकी वाणी में उमड़े भावों ने कथा को सजीव बना दिया। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अंजनी कुमार शुक्ला ने बताया कि मंदिर के 82वें स्थापना दिवस पर आयोजित यह रामकथा महोत्सव प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में रामायण के अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का भी भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा, जिसके लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में भक्तजन प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।
