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बीकानेर,जयपुर,संयुक्त अभिभावक संघ ने सीबीएसई की कार्यप्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब 17 वर्षीय विद्यार्थी सिद्धांत सार्वजनिक दस्तावेजों का अध्ययन कर सीबीएसई के टेंडर दस्तावेजों में कथित विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित कर सकता है, तो बोर्ड के अधिकारी और केंद्र सरकार इन सवालों पर जवाब देने से क्यों बच रहे हैं।

संघ का कहना है कि यदि टेंडर शर्तों में बदलाव, पात्रता मानदंडों में संशोधन और अन्य प्रक्रियागत परिवर्तनों को लेकर उठाए गए सवाल तथ्यात्मक हैं, तो सीबीएसई को सार्वजनिक रूप से उनका स्पष्टीकरण देना चाहिए। यह केवल एक टेंडर का नहीं, बल्कि करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का विषय है।

*संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा*, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस उम्र में विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते हैं, उस उम्र का एक छात्र व्यवस्था की खामियों को उजागर कर रहा है। यदि सिद्धांत द्वारा उठाए गए सवाल गलत हैं तो सीबीएसई तथ्य प्रस्तुत करे, और यदि सही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।”

उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे मूल्यांकन विवाद, पेपर लीक और प्रशासनिक खामियां शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई को विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शी जवाब देना होगा।

संयुक्त अभिभावक संघ ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और उठाए गए प्रत्येक सवाल का सार्वजनिक उत्तर जारी किया जाए।

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