













बीकानेर,जयपुर, गुरुवार को अजमेर रोड के चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी स्थित दिगंबर जैन मंदिर मे आयोजित पाठशाला में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अपने आशीर्वचनों में आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने धर्म को जीवन में उतारने, बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने तथा आत्मा के कल्याण की प्रेरणा दी। आचार्यश्री ने कहा कि केवल मंदिर, नदी या तालाब ही तीर्थ नहीं हैं, बल्कि सही श्रद्धा, सही ज्ञान और सही आचरण ही जीवन का वास्तविक तीर्थ हैं। उन्होंने बताया कि तीर्थंकर भी पहले सामान्य जीव थे, जिन्होंने तप, त्याग और संयम से अपने कर्मों को क्षीण कर भगवान पद प्राप्त किया।
प्रवचन देते हुए आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने बच्चों को धर्म, स्वाध्याय और सदाचार से जोड़ने पर विशेष जोर देते हुए कहा गया कि ” केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संस्कार भी जीवन के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने क्रोध, द्वेष और बदले की भावना से बचते हुए क्षमा, धैर्य और समता अपनाने का उपदेश दिया।” आचार्य श्री ने कहा कि अच्छे भाव, पूजा, तप और स्वाध्याय से कर्मों को हल्का किया जा सकता है तथा हर आत्मा में भगवान बनने की क्षमता विद्यमान है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन धर्म अध्ययन और बच्चों को संस्कारवान बनाने का आह्वान किया।
अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ का मंगल प्रवास चंद्रपुरी दिगंबर जैन मंदिर मे चल रहा है इस दौरान प्रतिदिन प्रातःकालीन सत्र में श्रावक और श्राविकाओं की उपस्थिति में जैन धर्म की पाठशाला का आयोजन होता है जिसमें आचार्य श्री अपने शब्दों को मुख पर उतारकर श्रद्धालुओं की आत्मा का कल्याणक कर ज्ञान की गंगा का रसपान करवा रहे है इस दौरान अगर किसी की कोई शंका होती है या मन में कोई प्रश्न उठता है तो वह उसका समाधान कर तृप्त करते है।
