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बीकानेर,राजकीय डूंगर महाविद्यालय के इतिहास विभाग एवं भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन शुक्रवार को हुआ।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि भारतीय जीवन मूल्यों एवं इतिहास की महानता को यूरोपीय देशों की तरह फिल्मों या सीरीज़ के माध्यम से युवाओं एवं जन-जन तक पहुँचाने की मुहिम होनी चाहिए जिससे हम कॉलोनियल मानसिकता से मुक्त हो सकें।

गोष्ठी के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बाल मुकुंद पांडे ने कहा कि भारतीय इतिहास के ग्रन्थ भारत केंद्रित होने चाहिए। हमें भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन की नहीं वरन् संकलन की आवश्यकता है। इसके लिए हमें भारत बोध विकसित करना होगा एवं इतिहास की घटनाओं में सकारात्मक पहलुओं को देखकर पुनः इतिहास संकलन करना होगा।

इस अवसर पर स्व. नरपत सिंह राजवी की स्मृति में इतिहास विषय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर उच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया ।

कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. राजेंद्र पुरोहित ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा प्रारंभ से ही समृद्ध रही है। अनुसंधान के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान जानकर एवं भारत बोध को विकसित कर ही हम अपने इतिहास के प्रति नजरिये को बदल सकते हैं।

अध्यक्षता करते हुए महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. मनोज दीक्षित ने बताया कि हमें अपने इतिहास पर गौरवान्वित होना चाहिए और उसे भारतीय दृष्टिकोण से जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि गौरतलब है और गर्व की बात है कि भारतीय ज्ञान परंपरा का उपयोग करते हुए यूरोपियन देश आगे बढ़ रहे हैं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विषय प्रवर्तन करते हुए संगोष्ठी के आयोजनाध्यक्ष डॉ. चंद्र शेखर ने संगोष्ठी के विषय एवं सत्रों की जानकारी प्रदान की। संगोष्ठी में देशभर के विद्वान इतिहासज्ञों एवं विद्वान विषय विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में अर्जुन अवार्डी मगन सिंह राजवी अंतरराष्ट्रीय फुटबालर एवं इतिहासकार डॉ.शिवकुमार मिश्रा मंचासीन रहे।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि भारतीय मनीषा ने प्राचीन काल से ही ऐसे-ऐसे ग्रन्थ और ज्ञान सूत्रों की खोज की है जिसके आधार पर आज पूरा विश्व आगे बढ़ रहा है और हमें इसे जानने की आवश्यकता है।

आयोजन सचिव डॉ. प्रेरणा माहेश्वरी एवं डॉ.अशोक शर्मा ने बताया कि समापन सत्र के अवसर पर राजस्थान राज्य अभिलेखागार के निदेशक चंद्रसेन सिंह एवं सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा श्री पुष्पेंद्र सिंह मंचासीन रहे ।

कार्यक्रम में अनेक विद्वान संकाय सदस्य, इतिहास संकलन समिति बीकानेर के अनेक सदस्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की भागीदारी रही।

कार्यक्रम का संचालन डॉ.देवेश सारण, डॉ.रमेश पुरी, डॉ.राज शेखर पुरोहित एवं डॉ.सुखाराम ने किया।

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