











बीकानेर,जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) द्वारा 4 मार्च को बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने के निर्णय से प्रदेशभर में गंभीर भ्रम, तनाव और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है। राज्य के अधिकांश जिलों में 4 मार्च को ही होली मनाई जा रही है, ऐसे में उसी दिन परीक्षा आयोजित करना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
संयुक्त अभिभावक संघ का स्पष्ट कहना है कि होली जैसे प्रमुख सामाजिक और धार्मिक पर्व पर परीक्षाएं रखना छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों—तीनों के लिए भारी परेशानी का कारण बन रहा है। कई क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सीमित रहता है, सामुदायिक आयोजन होते हैं और रंग-गुलाल के कारण परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित कर पाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है।
जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने होली को ध्यान में रखते हुए अपनी परीक्षाओं की तिथि में संशोधन किया, तो RBSE द्वारा अब तक कोई ठोस निर्णय न लेना शिक्षा विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
*संघ की मांग है कि:*
* 4 मार्च को प्रस्तावित RBSE बोर्ड परीक्षाओं की तिथि तत्काल बदली जाए।
* होली की तिथि को लेकर उत्पन्न भ्रम को समाप्त करने हेतु स्पष्ट और एकरूप आदेश जारी किया जाए।
* विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और समान अवसर को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
*संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने तीखे शब्दों में कहा:* “होली के दिन परीक्षाएं तय करना प्रशासनिक जड़ता और शिक्षा विभाग की असंवेदनशील सोच का प्रमाण है। क्या सरकार चाहती है कि बच्चे रंगों, भीड़ और अव्यवस्था के बीच जान जोखिम में डालकर परीक्षा देने जाएं? यह केवल एक तारीख का सवाल नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक शांति और भविष्य का प्रश्न है। यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो अभिभावक, शिक्षक और विद्यार्थी एकजुट होकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार को त्योहारों की जमीनी वास्तविकताओं को समझते हुए तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था पर एक गहरे दाग के रूप में देखा जाएगा।
संयुक्त अभिभावक संघ राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग करता है कि बिना विलंब इस विषय पर संवेदनशील, व्यावहारिक और छात्रहित में निर्णय लिया जाए, ताकि अनावश्यक तनाव और अव्यवस्था से बचा जा सके।
