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बीकानेर,जाम्भाणी साहित्य अकादमी के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय जाम्भाणी संस्कार शिविर के समापन समारोह में जोधपुर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक देवेंद्र बिश्नोई ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में गुरु जम्भेश्वर भगवान के सिद्धांत और 29 नियम पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि आज विश्व पर्यावरण संकट, प्रदूषण और नैतिक मूल्यों के ह्रास जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, जबकि गुरु जाम्भोजी ने लगभग 550 वर्ष पूर्व ही अपने नियमों के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर दिया था।

13 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित शिविर के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए देवेंद्र बिश्नोई ने कहा कि यह शिविर केवल पांच दिन का आयोजन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के संस्कार निर्माण का एक महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने युवाओं से गुरु जाम्भोजी के 29 नियमों का पालन करते हुए जीव दया, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने खेजड़ली बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वृक्षों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए दिया गया यह बलिदान विश्व का सबसे बड़ा पर्यावरण आंदोलन है।

कार्यक्रम में जाम्भाणी संस्कार शिविर के राष्ट्रीय संयोजक एवं लालासर साथरी महंत आचार्य डॉ. सच्चिदानंद ने कहा कि शिविर का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं में आत्म-अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा व्यसनमुक्त जीवन की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि आज समाज को नशामुक्त और संस्कारित युवा शक्ति की आवश्यकता है तथा गुरु महाराज के वचनों का अनुसरण कर युवाओं को हर प्रकार के व्यसन से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी एवं भामाशाह राजाराम धारणिया ने कहा कि शिक्षा रोजगार का माध्यम बन सकती है, लेकिन संस्कार जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है।

प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के वरिष्ठ शोध अधिकारी नितिन गोयल ने कहा कि संस्थान द्वारा बिश्नोई समाज के पास उपलब्ध जाम्भाणी साहित्य के संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से किया जाएगा, ताकि भावी पीढ़ियां भी इस अमूल्य धरोहर से लाभान्वित हो सकें।

अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के महासचिव रूपाराम कालीराणा ने समाज की विभिन्न संस्थाओं से एकजुट होकर समाजहित में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। वहीं जाम्भाणी साहित्य अकादमी के महासचिव विनोद जम्भदास ने अकादमी की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम को राजकमल, गोमती बिश्नोई, जितेंद्र धारणिया, सोहनलाल सियाग, लालचंद डूडी, भंवरलाल कड़वासरा, रामसिंह कस्वा, रामस्वरूप खीचड़, डॉ. कृष्णलाल बिश्नोई एवं बनवारीलाल डेलू सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि माता-पिता की सेवा, बुजुर्गों का सम्मान तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन ही वास्तविक जाम्भाणी संस्कार हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, हवन परंपरा और गुरु जाम्भोजी के 29 नियमों की शिक्षा देने का आग्रह किया।

समारोह के दौरान पांच दिवसीय शिविर में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं व्यवस्था संचालन में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों का सम्मान किया गया।

अंत में मोहनलाल लोहमरोड़ ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरिराम सियाग ने किया। उन्होंने कहा कि संस्कार शिविर समाज की युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।

इस अवसर पर बनवारीलाल सियाग, रामस्वरूप धायल, शिवराज खीचड़, स्योपत भाम्भू, रामरतन डेलू, ओमप्रकाश बिश्नोई, रामजस सियाग, रामप्रताप सियाग, सुभाष लोहमरोड़, जगदीश सियाग, रामेश्वरलाल देहरू, हनुमान बेनीवाल, डॉ. पुष्पा, विमला, प्रिंसिपल अनिता बिश्नोई, बुधराम गोदारा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, समाजबंधु एवं शिविरार्थी उपस्थित रहे।

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