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बीकानेर, राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑन वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट एंड हेल्थ द्वारा वन्यजीव रेस्क्यू तकनीकों पर तीन कार्यशालाओं का अयोजन किया गया। कार्यशालाओं के समन्वयक डॉ. जे.पी. कछावा ने बताया कि वन्यजीव रेस्क्यू तकनीको पर एक दिवस की तीन कार्यशालाओं का आयोजन 12 दिसंबर, 8 जनवरी  एवं 13 जनवरी 2026 को किया गया। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य वन्यजीवों के रेस्क्यू, सुरक्षित हैंडलिंग एवं पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) से संबंधित व्यवहारिक ज्ञान एवं कौशल को सुदृढ़ करना था। प्रशिक्षण सत्रों में वन्यजीव रेस्क्यू की मानक प्रक्रियाएं, रेस्क्यू पश्चात देखभाल, पुनर्वास तकनीकें तथा नैतिक एवं सुरक्षित हैंडलिंग के सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों को वन्यजीव प्रबंधन में प्रयुक्त रासायनिक नियंत्रण तकनीकों एवं डार्ट गन की प्रायोगिक जानकारी दी गई। तीनों कार्यशालाओं में कुल 60 पशुचिकित्सा के विद्यार्थियों ने भाग लिया। समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक अनुसंधान डॉ. बी.एन. श्रृंगी रहे। कार्यक्रम में संदीप चालानी, उप वन संरक्षक ने वन्यजीव रेस्क्यू के दौरान वन विभाग एवं पशु चिकित्सकों के बीच समन्वय के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान डॉ. स्पर्श दुबे द्वारा वन्यजीवों के पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) की प्रक्रियाओं, पोस्ट-रेस्क्यू केयर एवं पुनर्वास के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। डॉ. एल. एन. सांखला व डॉ. प्रियंका राठौड़ का प्रशिक्षण के आयोजन में सहयोग रहा। प्रशिक्षण के उपरान्त प्रशिक्षर्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये।

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