बीकानेर, खबर अपडेट, सावर्जनिक भू सम्पदा पर अतिक्रमण क्यों बढ़ते ही जा रहे हैं ? गोचर, ओरण, जोहड़ पायतन के आखिर मालिक कौन है। राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उच्चतम न्यायालय के इन सम्पदाओं को लेकर क्या निर्देश हैं। इन बातों से आम लोग वाकिफ है। इन सम्पदाओं का भू उपयोग नहीं बदला जा सकता। यह जिम्मेदारी तहसीलदार , जिला कलक्टर औऱ सरकार की हैं। विडम्बना यह है कि जिनकी जिम्मेदारी है वे कभी इधर झांकते ही नहीं है। वर्तमान जिला कलक्टर औऱ तहसीलदार ने यहां के कार्यकाल में एक दिन भी इन सार्वजनिक भू सम्पदा की सुध ली हो तो बताएं। दरअसल वीसी के बाहर प्रशासन का विजन ही नहीं रहा। गोचर, ओरण, जोहड़ पायतन की जमीनों पर गांव गांव में अतिक्रमण है। ये अतिक्रमण क्यों नहीं हटे हैं जवाब है जिम्मेदार अधिकारियों के पास। जिस सरेह नथानिया गोचर की सुरक्षा के लिए जनता के सहयोग से चाहर दीवारी बन रही है उसकी पैमाइश के लिए नागरिकों की ओर से दो साल पहले दर्जनों प्रार्थना पत्र दिए गए। पैमाइश क्यों नहीं हो रही है ? यहां हुए अतिक्रमणों के लिए कौन जिम्मेदार है। इसकी उनको क्या सजा मिली। प्रशासन की अनदेखी से गोचर 27 हजार बीघा से घटकर 23 हजार बीघा क्यों रह गई है। जनता देवी सिंह भाटी के नेतृत्व में गोचर सुरक्षा के लिए ही चाहर दीवार बना रही है इसके इतर कोई बात है क्या ? प्रशासन की एक महीने बाद नींद खुली है जब करीब दो किलोमीटर में दीवार बन गई है। यह अच्छी बात है जब 40 किलोमिटर दीवार बनने के समाचार छपे तो कान खड़े हुए। देवी सिंह भाटी जनता के साथ मिलकर अच्छा ही तो कर रहे हैं। होना तो यह चाहिए जिला कलक्टर भी जनता के साथ सहयोगी बनते औऱ सरकार को रिपोर्ट भेजकर सहयोग की अनुशंसा करते। हम तो रक्षा करेंगे नहीं, जनता को करने देंगे नहीं। भू माफिया या अतिक्रमण करने वालों को रोकेंगे नहीं। कितनी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि पूरे प्रदेश में इन भू सम्पतियों का यही हश्र हो रहा हैं। वाह रे सरकार …वाह रे प्रशासन। गोचर पर जनता का ध्यान नहीं होता तो इतनी भी नहीं बचती। क्या करना उचित है सरकार सोच लें। गोचर बचानी है या… ।