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बीकानेर, परमात्मा की पूजा, जप, साधना, कथा हो या किसी प्रकार का अनुष्ठान अथवा भक्ति उनके दरबार में कोई व्यक्ति दुखी नहीं रहे, यही उनके लिए सबसे बड़ा सुख का दिन होगा। जगत जननी पाताल लोक की पट्टरानी श्रीदेवी मां पद्मावतीजी, त्रिकाल योगी भैरवदेव सहित अनेक देवी देवताओं की प्रत्यक्ष इस धरा पर उपस्थिति को तप, साधना से चमत्कारों के रूप में देखा जा सकता है, जब यह अदृश्य शक्तियां अपने होने का अनुभव के रुप में एहसास कराती है तो व्यक्ति को असीम सुख, आनंद व समृद्धि की अनुभूति निश्चित होती है।
यह कहा श्रीकृष्णगिरी शक्तिपीठाधीपति, साधना के शिखर पुरुष पूज्यपाद जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज ने। सोमवार को यहां चैत्र नवरात्रि विराट कथा यज्ञ महोत्सव एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शास्त्रोक्त श्री महालक्ष्मी दिव्य महायज्ञ में ग्यारह दिवसीय ऐतिहासिक आयोजन के पांचवें दिन पवित्र दिव्य शक्तिपात रुपी आशीर्वाद प्रदान कर वे बोल रहे थे।
वैश्विक स्तर पर लोगों की बीमारी, ऋण रुपी उधारी एवं विभिन्न कष्टों के निवारणार्थ गंगाशहर राेड़ स्थित अग्रवाल भवन परिसर में अलौकिक स्वर्ग सरीखे भव्यतम पांडाल में हजारों लोगों की जेब में सिक्के, नोट, लॉन्ग, इलायची, कुमकुम, सिंदूर आदि प्राप्त हुए। वहीं बड़ी संख्या में हजारों लोगों को विभिन्न प्रकार की खुशबूओं का एहसास भी प्रतिदिन भक्तों को हो रहा है। यही नहीं दुनिया भर में यू ट्यूब चैनल थॉट योगा पर इस शक्तिपात कार्यक्रम को लाइव देखने वाले हजारों लोगों को भी विभिन्न प्रकार के देवदर्शन, रंगों की अनुभूति तथा रोग मुक्ति के अनेक चमत्कारिक अनुभव हुए।
कार्यक्रम में नगर निगम उपायुक्त यशपाल आहूल भी उपस्थित रहे। उनका श्री पार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट, कृष्णगिरी से जुड़े सदस्यों ने स्वागत सत्कार किया व पूज्य गुरुदेव श्रीजी ने आशीर्वाद दिया।
इस मौके पर कार्यक्रम में पूज्यश्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज साहब ने कहा कि देशनोक वाली मां करणी की कृपा प्राप्त राव बीकाजी की इस पावन पुनीत नगरी छोटीकाशी की बीकानेरियत भरी महिमा निराली है। प्रसंगवश मय उदाहरण के उन्होंने कहा कि सुख का अर्थ है हर हाल में सुखी रहना। चैत्र नवरात्रि पर्व के मद्देनजर मां की अनंतानंत महिमा का गुणगान पूज्यश्री ने किया। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म की महिमा और नारी की गरिमा को समझने की जरूरत है। आध्यात्म योगी संतश्रीजी ने अपने कई अनुभवों को साझा करते हुए समाज सुधार के तहत संस्कृति की विकृतियों, पाश्चात्य फैशन को त्यागने व धर्म संस्कृति की मर्यादाओं की रक्षा करने की भी प्रेरणा दी। साथ ही पंचम दिवस माँ स्कंदमाता के स्वरुप को कल्याणकारी एवं अति प्रेरणा दायक बताते हुए उन्होंने कहा कि कार्तिकेय जी को ही स्कन्द जी के नाम से जाना जाता है, इसी कारण माँ को स्कन्दमाता भी कहा जाता है। कार्तिकेय जी को पुरुषार्थ का स्वरूप बताया गया है। निरंतर अपने कर्म में संलग्न रहने वाला मनुष्य ही जीवन में ऊंचाइयों को प्राप्त करता है व प्रत्येक ऐच्छिक वस्तु उसे प्राप्त हो जाती है।

शक्ति आध्यात्मिक महोत्सव हर्षोल्लास से जारी

उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु श्रीजी की पुण्यदाई प्रेरणा से श्रीपार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट द्वारा मय सिद्ध साधना, निःशुल्क प्रसाद भंडारे के साथ बीकानेर में शक्ति आध्यात्मिक महोत्सव हर्षोल्लास से जारी है। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पूज्य गुरुदेव के अधिकृत वेरीफाइड यू ट्यूब चैनल थॉट योगा पर लाइव प्रसारित किया जा रहा है। प्रातः के सत्र में पूज्य गुरुदेव की निश्रा में जीबू कॉइन व पायरेट लक्ष्मी कुबेर यंत्र की बीज मंत्रों से नियमित पूजा, जप, साधना आराधना के बाद दोपहर को हवन यज्ञ में आहुतियां दी गई तथा रात में श्रीमद् देवी भागवत कथा में मां के व्यापक उल्लेख सहित देवाधिदेव महादेव की घर पर लोगों द्वारा नियमित पूजा की जाने वाली शिवलिंग की महिमा, मंत्रोच्चारण प्रतिष्ठा विधान का भी अभिनव दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव पहली बार संपन्न हुआ। साथ ही पूज्य जगद्गुरु श्रीजी के श्रीमुखारविंद से भक्ति संगीतमय प्रस्तुतियों से भजन संध्या में जयकारों व तालियों की गूंज ने समा बांधा।

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