











बीकानेर, खेल लेखक और समीक्षक झंवर लाल व्यास ‘रंगीला’ की स्मृति में आयोजित 19वीं जिला स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता के विजेताओं को रविवार को नत्थूसर गेट के बाहर स्थित लक्ष्मी नारायण रंगा सृजन सदन में पुरस्कृत किया गया।
रंगीला फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ खेल प्रशासक एड.एसएल हर्ष थे। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम को लगातार दो दशक तक आयोजित करना बड़ी उपलब्धि है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से अब तक अनेक युवा शातिरों ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि शतरंज मानसिक विकास के लिए आवश्यक खेल है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन द्वारा नए साथियों को प्रशिक्षित भी किया जाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार राजेंद्र जोशी ने नन्हे शातिरों से हार से सीखने और जीत की लय बरकरार रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेलों में अनुशासन और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि झंवर लाल व्यास ने खेल लेखन को नए आयाम दिए। युवाओं को इससे सीख लेनी चाहिए।
इससे पहले डॉ. हरिशंकर आचार्य ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा संस्थान के कार्यों की जानकारी दी।
आयोजन प्रभारी तथा बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एड. जुगल किशोर व्यास ने बताया कि 25 और 26 दिसंबर को आयोजित प्रतियोगिता के अंडर-14 वर्ग में 70 से अधिक शातिरों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के महिला एवं पुरुष वर्ग में पहले पांच स्थान प्राप्त करने वाले शातिरों के अलावा सभी शातिरों को प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए गए।
इस दौरान डीपी छींपा, हर्षवर्धन हर्ष, भानु प्रताप आचार्य, भवानी आचार्य, शिव शंकर बोहरा
श्री भानु आचार्य, दिव्या दाधीच और उषा ओझा को आर्बिटर के रूप में सेवाएं देने के फलस्वरूप सम्मानित किया गया।
संस्था अध्यक्ष एड. बसंत आचार्य ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन मधु सूदन व्यास ने किया।
इस दौरान पूर्व मिस्टर डेजर्ट राजेंद्र व्यास, खेल लेखक आत्माराम भाटी, मनीष जोशी, उमेश चूरा, अनिरुद्ध आचार्य, रोहित व्यास, विनीत व्यास सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
इन्हें दिए पुरस्कार
प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में प्रथम स्थान हासिल करने पर एकलव्य गोस्वामी और जैनम कोठारी, द्वितीय स्थान प्राप्त मानवेंद्र सिंह, तृतीय स्थान प्राप्त मोहम्मद अयान को पुरस्कार दिए गए। आदित्य चूरा को उत्कृष्ठ खिलाड़ी, देवांश बैद को अनुशासित खिलाड़ी और माहिर खत्री को सबसे छोटे शातिर का पुरस्कार दिया गया।
इसी प्रकार बालिका वर्ग में अन्वेषा व्यास को प्रथम, नैनसी बोडा को द्वितीय तथा दिया रंगा को तृतीय तथा प्रियांशी चूरा को सबसे छोटी बालिका शातिर का पुरस्कार दिया गया।
