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बीकानेर, मौसूण परिवार द्वारा श्रीमद्भागवत कथा एवं नानी बाई मायरा आयोजन की पूर्णाहुति महोत्सव के रूप में हुई। श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हुए महामंडलेश्वर श्री बजरंगदास जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा आयोजन केवल कथा सुनने-सुनाने का प्रकल्प नहीं बल्कि आप सबको अध्यात्म की यात्रा करवाने का माध्यम है, श्रीकृष्ण का सान्निध्य पाने का अवसर है। कथा को सुनो और उसे अपने चरित में प्रवाह करो। आचार्य श्री बजरंगदास जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हमें संस्कारों की सीख देती है। माता-पिता का आदर करें, अपने सास-ससुर की माता-पिता के समान सेवा करें। गुरु आज्ञा का पालन करें और घर आए अतिथि का सम्मान अवश्य करें। माफ करना सीखें और शांत रहना सीखें। श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह, श्रीकृष्ण लीलाओं के साथ श्रीमद्भागवत ग्रंथ की आरती, हवन-प्रसादी के साथ कथा की पूर्णाहुति की गई। मोहनलाल-दुर्गा सोनी एवं महावीर सोनी ने श्रीमद्भागवत ग्रंथ को शिरोधार्य करते हुए शोभायात्रा ठाकुरजी मंदिर पहुंची। श्रीमद्भागवत कथा के साथ ही आरती रांकावत बेरासर द्वारा तीन दिवसीय नानी बाई मायरा कथा का वाचन किया। तृतीय व अंतिम दिवस की कथा के दिन मौसूण परिवार ने गाजे-बाजे के साथ मायरा भरा तथा खाटूश्याम कीत्रन का आयोजन किया गया। आयोजक परिवार के महावीर मौसूण ने बताया कि कथा पूर्णाहुति अवसर पर भाजपा शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़, विधायक सिद्धि कुमारी, विधायक जेठानन्द व्यास का आतिथ्य रहा। इस दौरान कथा आयोजन में समर्पित कार्यकर्ताओं एवं सेवादारों का अभिनंदन किया गया।

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