











बीकानेर,गुवाहटी.ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा क्यूरेट व गुवाहाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय साहित्य महोत्सव “इकोज़ ऑफ़ नॉर्थ ईस्ट” संपन्न हो गया । गुवाहाटी विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यह महोत्सव उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक कथाओं का सजीव उत्सव बनकर उभरा।
इस महोत्सव में उत्तर-पूर्व के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित लेखक, कवि, शिक्षाविद और विचारक एकत्रित हुए, जिन्होंने भाषा, पहचान, स्मृति, पारिस्थितिकी और कहानी कहने जैसे विषयों पर सार्थक संवाद किया। यह आयोजन प्रभा खेतान फ़ाउंडेशन की उस प्रतिबद्धता को दोहराता है, जिसके तहत वह ऐसे समावेशी सांस्कृतिक मंच तैयार करता है जो क्षेत्रीय आवाज़ों को सशक्त बनाते हैं और साहित्य व जीवनानुभवों से उपजे संवाद को बढ़ावा देते हैं। दो दिनों तक चले इस कार्यक्रम में विचारोत्तेजक विमर्श की दिशा तय की। कार्यक्रम के दौरान उत्तर-पूर्वी भारतीय साहित्य में महिलाओं की आवाज़ें, अंग्रेज़ी में उत्तर-पूर्व का साहित्य, और मातृभाषा की आवश्यकता जैसे सत्र आयोजित किए गए जिनमें इस क्षेत्र की भाषाई और वैचारिक विविधता को रेखांकित किया। सम्मेलन में “बोलते हुए पहाड़: उत्तर-पूर्वी कविता में प्रकृति की आवाज़” और “नदियाँ, वर्षा और जड़ें: उत्तर-पूर्वी कविताओं में पारिस्थितिकी” आदि विषयों पर चर्चा हुई ।
दूसरे दिन की शुरुआत मेरी साहित्यिक प्रेरणाएँ, अपनी कहानियाँ स्वयं कहना: उत्तर-पूर्व की आवाज़ें, और उत्तर-पूर्वी लेखन में मिथक, किंवदंती और इतिहास जैसे सत्रों से हुई, जिन्होंने कथाओं के पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक स्मृति के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। सभी सत्रों में अध्यक्षों और वक्ताओं ने श्रोताओं के साथ गहन संवाद किया, जिससे छात्रों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों के बीच विचार-विमर्श और आत्ममंथन को बढ़ावा मिला। कार्यक्रम में उत्तर-पूर्व के लेखक, कवि और शिक्षाविद—जैसे ध्रुबज्योति बोरा, एन. किरण कुमार सिंह, डखार स्ट्रीमलेट, ज्योतिर्मय प्रोधानी, सत्यकाम बोरठाकुर, कैरी मोग चौधरी, पोनुंग एरिंग आंगु सहित अनेक अन्य विद्वानों ने चर्चाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने बहुमूल्य विचार साझा किए। प्रभा खेतान फ़ाउंडेशन ने पुनः यह विश्वास व्यक्त किया कि साहित्य संवाद, संवेदना और सामाजिक जुड़ाव का एक सशक्त माध्यम है, और उत्तर-पूर्व की आवाज़ों को राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर निरंतर मंच मिलना चाहिए।
