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बीकानेर,डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया ने लोगों की जिंदगी को सरल बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी ठगी के नए-नए तरीके विकसित कर लिए हैं। वर्तमान समय में बाजार में 1000 से अधिक तरीकों से साइबर अपराध किए जा रहे हैं और प्रतिदिन नए तरीके सामने आ रहे हैं। आजकल अपराधी फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करते हैं, केवाईसी अपडेट के नाम पर लिंक भेजते हैं और ओटीपी लेकर खाते से रकम निकाल लेते हैं। इसके अतिरिक्त व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर निवेश का झांसा, ऑनलाइन जॉब ऑफर के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, QR कोड स्कैन करवाकर भुगतान तथा तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अब तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर परिचित व्यक्ति की आवाज या वीडियो बनाकर भी लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।

साइबर अपराध से बचाव के लिए आवश्यक है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी या बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा न करें तथा लालच या डर के आधार पर कोई भुगतान न करें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित नंबर का ही उपयोग करें तथा सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सीमित रखें। विशेष रूप से टेलीग्राम या अन्य प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार की इन्वेस्टमेंट स्कीम में निवेश करने से बचें। “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई भी प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 या किसी अन्य विशेष कानून में मौजूद नहीं है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को पुलिस अधिकारी, कस्टम अधिकारी या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल करे और भय का वातावरण बनाकर धन की मांग करे, तो घबराने के बजाय तुरंत किसी साइबर विशेषज्ञ अधिवक्ता से परामर्श लें।

यदि आपके साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो समय न गंवाएं। सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें और उसके बाद निकटतम पुलिस थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करवाएं। तुरंत शिकायत करने से ठगी की गई राशि को रोकने या वापस प्राप्त करने की संभावना काफी बढ़ जाती है। सतर्कता और समय पर की गई कानूनी कार्रवाई ही साइबर अपराध के विरुद्ध सबसे प्रभावी उपाय है।

एडवोकेट रेवंत सिंह (गंभीर आपराधिक प्रकरण एवं साइबर अपराध विशेषज्ञ)

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