Trending Now

बीकानेर,जयपुर,राजधानी में एक बार फिर निजी स्कूलों की फीस को लेकर अभिभावकों आक्रोश बढ़ते जा रहा है, जैसे-जैसे स्कूलों में नया सत्र प्रारंभ हो रहा है निजी स्कूलों की मनमानी करने की पोल खुलती जा रही है। मंगलवार को सिरसी रोड़ स्थित स्कॉटल हाई स्कूल में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला और देखते ही देखते एक – एक कर अभिभावक जुटने लगे और विरोध के स्वर भी बढ़ने लगा विरोध इतना बड़ा की 300 से अधिक अभिभावक स्कूल के बाहर आकर विरोध प्रदर्शन करने लगे, इस दौरान अभिभावकों स्कूल प्रशासन की खुली चेतावनी दी कि अगर स्कूल ने मनमानी फीस वसूलने का आदेश वापस नहीं लिया तो यह विरोध प्रदर्शन ना केवल उग्र होगा बल्कि स्कूल के निर्णय पर कोर्ट में चुनौती दी जाएगी क्योंकि स्कूल ने जो फीस बढ़ाई है वह अभिभावकों को बिना सूचना दिए बढ़ाई है और यह प्रक्रिया ना केवल स्कूल फीस एक्ट के खिलाफ है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के भी खिलाफ है। संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि अगर स्कूल ने फीस एक्ट की पालना किए बगैर फीस मनमाने तरीके से बढ़ाई है तो शिक्षा विभाग को तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए जो शासन और प्रशासन की ना केवल जिम्मेदारी है बल्कि जवाबदेही भी है।

संयुक्त अभिभावक संघ राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने सिरसी रोड़ स्थित स्कॉटल हाई स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से सूचना प्राप्त हुई थी कि स्कूल ने बिना किसी पूर्व सूचना के मनमाने तरीके स्कूल बढ़ा दी है जिसके विरोध में सभी अभिभावक एकत्रित हुए है, इसके पश्चात हम वहां पहुंचे और अभिभावकों की पीड़ाओं का जाना और स्कूल प्रशासन से मिलने की इच्छा जताई किंतु स्कूल प्रशासन ने मिलना तो दूर अभिभावकों को स्पष्ट कह दिया कि फीस स्कूल के हिसाब से रहेगी जिसको तकलीफ है वह अपने बच्चों का दूसरे स्कूल में दाखिला करवा लेवें।

अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि फीस एक्ट में स्पष्ट प्रावधान है कि बिना पीटीए और एसएलएफसी कमेटी के गठन किए बगैर निजी स्कूल एक रु की भी फीस नहीं बढ़ा सकते है किंतु स्कूल ने ना पीटीए का गठन किया हुआ है और ना एसएलएफसी कमेटी बनाई हुई है इसके बावजूद हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाकर अभिभावकों को प्रताड़ना दी जा रही है। स्कॉटल हाई स्कूल वर्ष 2023-24 में 60500 रु फीस लेता था, फिर वर्ष 2024-25 में यह फीस बढ़कर 77500 रु हो गई और अब इस वर्ष यह फीस 96500 रु कर दी गई अगर पिछले वर्ष से इस वर्ष की फीस की तुलना की जाए तो यह 30 फीसदी अधिक है और दो वर्ष पूर्व से तुलना करे तो यह 50 फीसदी फीस अधिक हो गई। इस स्कूल फीस में किताबे, स्टेशनरीज, स्कूल ड्रेस, शूज, ट्रांसपोर्ट फीस का खर्चा अलग से देना पड़ता है जिसका सालाना 60-70 हजार रु का खर्चा अलग से वहन करना पड़ता है अगले एक – दो दिनों में अभिभावकों की समस्याओं का निवारण नहीं किया तो प्रदर्शन शिक्षा संकुल पर होगा और मामला कोर्ट में भी जाएगा जहां स्कूल और शिक्षा विभाग के खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के तहत कार्यवाही की मांग न्याय पालिका से की जाएगी।

Author