












बीकानेर,जयपुर,राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर खंडपीठ द्वारा 08 जनवरी को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) को लेकर दिए गए ऐतिहासिक निर्णय की अविलंब पालना सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने आज शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल, शिक्षा निदेशक सीताराम जाट और जयपुर जिला शिक्षा अधिकारी सुशील सिंघल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस दौरान संघ प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू, विशाल मुद्गल, इमरान कुरैशी, निजामुद्दीन, संदीप कुमार, कुलवंत सिंह, चंद्रशेखर शर्मा सहित बड़ी संख्या में आरटीई में चयनित विद्यार्थियों के अभिभावक शामिल हुआ।
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया कि माननीय उच्च
न्यायालय ने प्रदेश के सभी निजी
विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 1 तक जहाँ भी प्रवेश दिया जाता
है, वहाँ 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के अंतर्गत प्रवेश अनिवार्य किए जाने का स्पष्ट आदेश पारित किया है। इसके
बावजूद कई निजी विद्यालय आदेश की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं और शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।
संघ ने बताया कि सत्र 2025-26 के लगभग 44,000 से अधिक आरटीई प्रवेश अब भी लंबित हैं, जिसके कारण हजारों गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। यह स्थिति न केवल न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला भी है।
*संयुक्त अभिभावक संघ के राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कड़े शब्दों में कहा—* “माननीय उच्च न्यायालय का आदेश किसी सलाह या विकल्प की तरह नहीं, बल्कि कानून का आदेश है, जिसका पालन हर हाल में होना ही होगा। निजी विद्यालय वर्षों से प्री-प्राइमरी की आड़ लेकर आरटीई से भागते रहे हैं, लेकिन अब न्यायालय ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है। इसके बावजूद यदि शिक्षा विभाग आंख मूंदे बैठा रहा और निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम नहीं लगी, तो यह सीधे-सीधे न्यायालय की अवमानना होगी।”
*उन्होंने आगे कहा—* “44 हजार से अधिक बच्चों का भविष्य नो माह बाद भी आज भी अधर में लटका हुआ है और शिक्षा विभाग केवल फाइलों में आदेशों की खानापूर्ति कर रहा है। यदि अब भी लंबित आरटीई प्रवेश तुरंत पूर्ण नहीं कराए गए और आदेशों का उल्लंघन करने वाले निजी विद्यालयों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन एवं विधिक कार्यवाही के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।”
संघ ने यह भी मांग की कि प्री-प्राइमरी एवं कक्षा 1 में आरटीई के तहत हुए प्रवेशों का शुल्क पुनर्भरण समयबद्ध रूप से किया जाए, ताकि निजी विद्यालय इसे बहाना बनाकर बच्चों को प्रवेश से वंचित न कर सकें। संयुक्त अभिभावक संघ ने चेतावनी दी है कि नए सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने से पहले सत्र 2025-26 के सभी चयनित विद्यार्थियों का दाखिला सुनिश्चित करना अनिवार्य किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
