












बीकानेर,राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मनरेगा का नाम बदलकर वीबीजी रामजी योजना रखना राजनीतिक मुद्दा बन गया है। कांग्रेस अगला पंचायत चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ने की व्यूह रचना पर काम करती दिखाई देती है। राष्ट्रीय कांग्रेस, प्रदेश कांग्रेस और जिला कांग्रेस इस मुद्दे पर एक घोषित कार्य योजना के तहत अभियान चला रही है। यह अभियान जिला स्तर से लेकर ग्राम और वार्ड स्तर पर चलाया जा रहा है। कांग्रेस के सब नेता इस मुद्दे पर एक मंच पर है। कांग्रेस की इस सक्रियता का असर प्रदेश की भाजपा सरकार और संगठन पर पड़ा है। भाजपा भी बचाव में दल बल के साथ उतर गई है। भाजपा संगठन ने वीबीजी रामजी योजना के प्रचार प्रसार और कांग्रेस के अभियान के काट के लिए संगठन में प्रभारी नियुक्त किए हैं।
वहीं बीकानेर जिले के प्रभारी मंत्री और अन्य मंत्री भी इस योजना के पक्ष में सरकार का लोजिक रख रहे हैं। बीकानेर यात्रा के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तथा जिला प्रभारी मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस मुद्दे पर कांग्रेसी नेताओं की प्रेस कानफ्रेस में दिए तथ्यों के जवाब में कहा कि कहा कि भारत-जीरामजी’ योजना से गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता की क्रान्ति: आएगी। ‘विकसित भारत-जीरामजी योजना’ से ग्रामीण जीवन में बड़े बदलाव आएंगे। ‘विकसित भारत-जीरामजी योजना’, सिर्फ रोजग़ार का वादा नहीं, यह स्थायी आजीविका की गारंटी है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाकर विकसित भारत की नींव मजबूत करेगी। भाजपा के इस दावे के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बीकानेर में कांग्रेस ने महात्मा गांधी समाधि के आगे एक दिन का उपवास से अभियान की शुरुआत की है। कांग्रेस से बीकानेर की प्रभारी विधायक शिमला नायक ने बीकानेर 25 फरवरी तक ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर के विरोध प्रदर्शनों का पूरा कैलेंडर जारी कर दिया है।
बीकानेर देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशना राम सियाग के कुशल नेतृत्व में कांग्रेस मिलजुल कर संगठित रूप से धरातल पर काम कर रही है। इसमें शहर जिलाध्यक्ष मदन मेघवाल, पूर्व मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल, पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी, पूर्व विधायक मंगला राम गोदारा समेत अन्य नेता और संगठन के पदाधिकारी एकजुट है। बीकानेर प्रभारी विधायक शिमला नायक ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है. पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार नाम बदलकर और नियमों में बदलाव कर इस ऐतिहासिक योजना को कमजोर करना चाहती है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाने की रणनीति बनाई है। इस योजना की क्रियान्विति के क्या परिणाम होंगे यह तो समय ही बताएगा। कांग्रेस की मनरेगा कि तरफदारी और विकसित भारत-जीरामजी योजना’ की आलोचना एक बात है। वहीं भाजपा की विकसित भारत-जीरामजी योजना’ वकालत अपनी जगह है। सबसे गंभीर बात यह है कि कांग्रेस और भाजपा के बीच इस योजना के मुद्दे पर राजनीतिक प्रभाव पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनाव में प्रतिध्वनित हो सकते हैं।
