बीकानेर, प्रदेश की जेलों में हालात विकट है। क्षमता से अधिक बंदी रखे गए हैं। जेलों का आलम यह है कि १० में से सात बंदी अंडरट्रायल है। यानी कि जेलों में ६२ प्रतिशत बंदी विचाराधीन हैं। पिछले दो साल से कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे समय में भी जेलों में बंद बंदियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कोरोना के चलते एहतिहात व सतर्कता जरूरी है लेकिन वर्तमान हालात में ‘दो गज की दूरी, मास्क है जरूरीÓ जेलों में कैसे मुमकिन है। यह स्थिति प्रदेश के ३३ जिलों में जिला एवं सब जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों को रखने से बनी हैं। प्रदेश की दस सेंट्रल जेलों में १० हजार ३८७ बंदियों को रखने की क्षमता है लेकिन वर्तमान में इन जेलों में १० हजार १०७ बंदी मौजूद हैं। इनमें से ३८ फीसदी बंदी सजायाफ्ता और ६२ फीसदी विचाराधीन बंदी हैं।

इन जेलों से आए बंदी
बीकानेर केन्द्रीय कारागार की क्षमता १२०० हैं लेकिन वर्तमान में १५४२ बंदी हैं। इनमें ११२९ विचाराधीन, ४२७ कठोर कारावास, २९ साधारण सजा, २ पाकिस्तानी एवं ६६ महिला बंदी हैं। साथ ही कोरोना के चलते प्रदेश के कई जिलों से बंदियों को यहां शिफ्ट किया गया। नागौर से ९८, फलौदी से ९७, पोकरण से ५०, बोलोतरा से ५०, हनुमानगढ़ से ४८७, चूरू से ७५ बंदियों के अलावा सूरतगढ़ व अनूपगढ़ उप कारागार से भी बंदियों को शिफ्ट किया गया।

बंदियों के भी मानवाधिकार
हाल में दो-तीन साल पहले सर्वोच्च न्यायालय ने बंदियों के मामले में एक टिप्पणी की थी, जिसमें कहा था कि कैदियों को जानवरोंा की तरह नहीं रख सकते। बंदियों के भी मानवाधिकार है। वही पुलिस व जेल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जेल में रहने वाले भी इंसान है, ऐसे में उनकी मूलभूत सुविधाओं को स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी सरकार का दायित्व है।

प्रदेश की अन्य जेलों में यह है हालात
जेल क्षमता मौजूद बंदी
जयपुर केन्द्रीय कारागार ११७३ १३००
कोटा केन्द्रीय कारागार ९१४ १४३७
जोधपुर केन्द्रीय कारागार १४७५ १५००
बीकानेर केन्द्रीय कारागार १६०० १५४२
उदयपुर केन्द्रीय कारागार ९३५ १२००
सीकर केन्द्रीय कारागार २२४ ३००

श्रीगंगानगर ५६० २६२
चूरू १६३ २८४
हनुमानगढ़ ३५० ५३०
भीलवाड़ा २२५ २९०
नागौर ६१ १०१
चितौडग़ढ़ ३३८ ५९३
पाली ६० १२०
झुंझुनूं २१० २४६
डूंगरपुर ७० १४०

उप कारागार के हाल
उप कारागार क्षमता मौजूद बंदी
अनूपगढ़ २२० २३५
करणपुर ६५ ९१
रायसिंहनगर ५५ ८२
सूरतगढ़ १०५ १६२
रतनगढ़ ३० ६६
फलौदी १६ २२
रामगंजमंडी ४० ६७
नीमकाथाना ६० ७०
हिंडौन ७९ ११०
निम्बाहेड़ा ५० ८७
कपासन २५ ५७
बाली ३० ५५
सोजत ५५ ९६
जैतारण ११० १३०

कुछेक जेलों में क्षमता से कम है बंदी
जैसलमेर की मुख् कारागार की क्षमता १५० और वर्तमान वहां निरुद्ध बंदी १४४, पोकरण उपकारागार की क्षमता १५ और मौजूदा १२, उदयपुर की पांच उप कारागारों की क्षमता ५०० और वर्तमान में निुरुद्ध बंदी ३००, डूंगरपुर की उप कारागार सागवाड़ा की क्षमता १०० व वर्तमान में निरुद्ध बंदी ८९, करौली कारागार की क्षमता १९० व वर्तमान में ११५ बंदी निरुद्ध है। प्रदेश की यही जेले ऐसी हैं, जहां क्षमता के मुताबिक भी बंदी नहीं हैं।

एक नजर में …
केन्द्रीय कारागार १०
जिला जेल २६
उप कारागार ६०
सात महिला जेल
एक हाई सिक्योरिटी
एक किशोर सुधार बंदी गृह जैतारण

यह सही, हालात विकट है
जेलों में क्षमता से अधिक बंदी है, यह सही है। प्रदेश में कई जेलों का रिनोवेशन कराया गया है। ऐसे में बंदियों को नजदीकी जेलों में शिफ्ट किया गया था। अब जिन जेलों में भार अधिक है वहां से नजदीकी जेलों में शिफ्ट किया जाएगा। प्रदेश में १० केन्द्रीय कारागार में से जयपुर, उदयपुर व कोटा की स्थिति विकट हैं।