










बीकानेर,जयपुर,कोटा में 11वीं कक्षा की छात्रा द्वारा आत्महत्या की हालिया घटना ने एक बार फिर प्रदेश के अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। संयुक्त अभिभावक संघ ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले कोटा में जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों में आत्महत्या की घटनाएं सामने आती थीं, लेकिन अब स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी लगातार इस तरह के कदम उठा रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। संघ ने कहा कि लगातार बढ़ रही छात्र आत्महत्याओं के कारण प्रदेशभर के अभिभावक भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं।
प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू के अनुसार अकेले कोटा शहर में कोचिंग छात्रों की आत्महत्या के मामले पिछले वर्षों में लगातार सामने आते रहे हैं। वर्ष 2023 में 40 से अधिक, 2024 में 35 से अधिक और 2025 में भी कम से कम 40 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
इसके अतिरिक्त स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के भी अलग-अलग जिलों से लगातार आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं, जो बताता है कि समस्या केवल कोचिंग तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में मानसिक दबाव और अस्वस्थ माहौल गहराता जा रहा है।
*संयुक्त अभिभावक संघ ने सवाल उठाया कि*
* जब लगातार छात्र आत्महत्याएं हो रही हैं तो राज्य सरकार और प्रशासन आखिर क्या कर रहे हैं?
* सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग व्यवस्था को लेकर दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
* केंद्र सरकार की गाइडलाइन केवल कागजों तक ही क्यों सीमित है?
* जिस कोचिंग रेगुलेटरी एक्ट को सरकार ने बड़े दावे के साथ लागू किया था, वह आज तक जमीनी स्तर पर लागू क्यों नहीं हो पाया?
संघ ने कहा कि स्थिति यह है कि न तो कोचिंग सेंटरों पर सरकार की लगाम है और न ही स्कूलों पर कोई प्रभावी निगरानी। शिक्षा के नाम पर चल रहे संस्थानों में छात्रों पर बढ़ता दबाव और व्यवसायीकरण लगातार खतरनाक रूप ले रहा है।
*संयुक्त अभिभावक संघ की प्रमुख मांगें*
1. प्रदेश के सभी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में अनिवार्य मनोवैज्ञानिक काउंसलर नियुक्त किए जाएं।
2. प्रत्येक संस्थान में मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन और नियमित काउंसलिंग सत्र अनिवार्य किए जाएं।
3. कोचिंग रेगुलेटरी एक्ट का सख्ती से पालन करवाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर कार्रवाई हो।
4. छात्रों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव, अत्यधिक टेस्ट और अनुचित प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू किए जाएं।
5. छात्र आत्महत्या के मामलों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए और जिम्मेदार संस्थानों की जवाबदेही तय की जाए।
6. स्कूल और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं।
*संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कड़े शब्दों में कहा कि* – “स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों के बच्चों में लगातार बढ़ते आत्महत्या के मामले यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि आज की शिक्षा व्यवस्था शिक्षा नहीं बल्कि अपराधी शिक्षा का रूप ले चुकी है। शिक्षा माफिया बच्चों को पढ़ाने से ज्यादा उन्हें एक व्यवसायिक उत्पाद की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ाई कम और कमाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यदि सरकार और प्रशासन अब भी नहीं जागे तो यह शिक्षा व्यवस्था आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाएगी। संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश के विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगा।”
संघ ने राज्य सरकार से मांग की कि वह इस गंभीर समस्या को केवल आंकड़ों और बयानों तक सीमित रखने के बजाय ठोस और प्रभावी कदम उठाकर छात्रों की जिंदगी सुरक्षित करे।
