








देराजसर (बीकानेर)चुरू जिले के सहनाली बड़ी गांव में दूल्हे ने बिना दहेज शादी कर समाज के लिए एक मिसाल प्रस्तुत की है। ससुराल पक्ष से केवल एक रुपया और नारियल लेकर दुल्हन को विदा कराकर घर लाया। दूल्हे की इस फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है।
दुल्हे शक्ति ने गत 11मार्च 2026 को सोमलसर गांव हाल चुरु के स्व.सोहनलाल उपाध्याय के पुत्र श्रवण कुमार की बेटी अरूणा के साथ रचाए विवाह में शुगन के तौर पर एक रुपया और नारियल लेकर एक मिसाल कायम की है। दरअसल, सहनाली बड़ी गांव के सांवरमल तावणिंया के पुत्र शक्ति शुरु से ही लड़कियों को उच्च शिक्षा देने का हिमायती रहा है। साथ ही दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या और नशे जैसी बुराइयों का कड़ा विरोधी रहा। जब उसके रिश्ते की बात चुरू निवासी श्रवण कुमार उपाध्याय की पुत्री अरूणा के साथ चली तो उसने पहले ही दहेज न लेने की बात स्पष्ट कर दी।
*बेटा से पिता भी काफी प्रभावित, मानी बात*
दूल्हे सॉफ्टवेयर इंजीनियर शक्ति ने कहा कि एक उच्च शिक्षित व गुणवान युवती से उसका विवाह होना ही उसके लिए सबसे बड़ा दहेज होगा। शक्ति की इस बात से उसके पिता सावंरमल तावणिंया भी राजी थे। दामाद की दृढ़ इच्छा को भांपते हुए श्रवण कुमार उपाध्याय भी बगैर दहेज शादी के लिए राजी हो गए। चुरू के ओंकार वाटिका में सादगी से संपन्न हुए शक्ति व अरूणा के विवाह समारोह में नवदंपती को आशीर्वाद देने के लिए बड़ी संख्या में समाज के लोग भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि शक्ति द्वारा बगैर दहेज शादी समाज के लिए गर्व की बात होने के अलावा एक मिसाल बन गई है। समाज में इस तरह की शादियां होना अच्छी पहल है। दुल्हे के पिता के फूंफा लूणाराम सारस्वा देराजसर ने भी शक्ति की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि समाज का हर शख्स ऐसे निर्णय लेने लग जाएं तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और किसी भी बाप को अपनी बेटियां बोझ नहीं लगेगी।
