












बीकानेर,वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर एवं उपनिदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक (आत्मा) हनुमानगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आत्मा योजनान्तर्गत अन्तर्राज्य पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन बुधवार को हुआ। प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य अतिथि विधायक, खाजुवाला व विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल के सम्मानित सदस्य डॉ. विश्वनाथ मेघवाल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने की। प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन, पशुपालकों की आजिविका का मुख्य व्यवसाय है। राजस्थान के मरूस्थली क्षैत्रो में मौसम की विपरित परिस्थितियों में पशुपालन किसानों क लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कृषि एवं वेटरनरी विश्वविद्यालय के दशकों से प्रसार, नवाचार एवं शोध परिणामों से इस क्षैत्र में कृषि एवं पशुपालन को सुदृढता मिली है जिसके परिणाम स्वरूप कृषकों को स्वरोजगार एवं आर्थिक स्वावलम्बन मिला है विकासशील परिवर्तन देखने को मिला है। डॉ. मेघवाल ने कृषकों को प्रशिक्षणों के माध्यम से अर्जित ज्ञान एवं कौशल को समुचित उपयोग में लेने एवं अधिक से अधिक दूसरे पशुपालक भाईयों को भी प्रेरित करने हेतु प्रोत्साहित किया। डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने विद्यार्थियों को नये शोध एवं नवाचारों से राज्य में पशुपालक हितार्थ कार्ये करने हेतु भी प्रेरित किया। डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि राज्य के किसानों एवं पशुपालकों के आर्थिक एवं कौशल उत्थान हेतु व विश्वविद्यालयों के वित्तिय सुदृढीकरण हेतु राज्य एवं केन्द्र सरकार से सभी प्रयास करेंगे। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने अपने अध्यक्ष्य उद्बोधन में बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय शिक्षा, प्रसार एवं अनुसंधान के क्षैत्र में विकास हेतु अथक प्रयासरत है। वेटरनरी विश्वविद्यालय लम्बे समय से किसानों एवं पशुपालकों हेतु पशुपालन की क्षैत्र की विभिन्न समस्याओं का समाधान कर उनके विकास के लिए कार्य कर रहा है।। कुलगुरु डॉ. सुमन्त व्यास ने कहा कि डॉ. विश्वनाथ मेघवाल का कृषि एवं वेटरनरी विश्वविद्यालय से लम्बे समय से सम्बन्ध रहा है उनके सहयोग एवं दुरदर्शिता से विश्वविद्यालय पशुपालकों, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के कल्याण हेतु विभिन्न नीति निर्धारण कर विकास हेतु कार्य करेगा। निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने स्वागत सम्बोधन दिया और विश्वविद्यालय की राज्य के विभिन्न जिलों में गांव-ढाणी तक प्रयारित प्रसार कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की। डॉ. धूड़िया ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नोहर, भादरा एवं हनुमानगढ़ से कुल 30 अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालको ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान “उन्नत पशुपालन तकनीक” विषय पर प्रशिक्षण संदर्शिका एवं “पशुपालन नये अयाम” हिन्दी मासिक पत्रिका के नवीन अंक का विमोचन भी किया गया। धन्यवाद ज्ञापन निदेशक अनुसंधान डॉ. बी.एन. श्रृंगी ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. देवीसिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान निदेशक पी.एम.ई. प्रो. उर्मिला पानू, निदेशक क्लिनिक्स प्रवीण बिश्नोई, निदेशक एच.आर.डी. राहुल सिंह पाल सहित फैकल्टी सदस्य, पशुपालक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
