













बीकानेर, एक अप्रेल को “अप्रेल फूल दिवस पर” शहर के रचनाकारों ने अम्बेडकर सर्किल स्थिति हर्ष निवास में आयोजित हंसी-मजाक पर आधारित कार्यक्रम “दिल से हंसो” की अध्यक्षता करते हुए डॉ. एस एन हर्ष ने बताया कि चौबीस घण्टे में केवल दस मिनट हंसने मात्र से शरीर में रोग प्रतिरोधकता बढ़ जाती है जिससे आदमी स्वस्थ रहते हुए तनावमुक्त रहता है। मुख्य अतिथि वरिष्ठ हाष्य-व्यंग्य कवि गौरीशंकर मधुकर ने अपने चुटीले अंदाज में अपनी छोटी-छोटी रचनाओं के माध्यम से जीवन की विसंगतियों पर करारा प्रहार करते हुए सामाजिक परिवेश में रहते हुए हंसने के गुर बताए। विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद डॉ. अभयसिंह टॉक ने अपनी हाष्य रचना सुनाते हुए इसके गुणों की तरफ ध्यान आकर्षित किया।कार्यक्रम में ज्योति वधवा “रंजना” ने सरस्वती का आह्वान करते हुए अपनी रचना हे सुर की देवी मां वाणी में मधुरता दो से कार्यक्रम की श्रीगणेश किया, अपनी रचना बड़ा और छोटा डस्टबीन सुनाकर तालियां बटोरी। राजेन्द्र स्वर्णकार ने अपनी हास्य रचना- कुकडू कुडूड कू- कुकडू कुडूड कू / सर पे सूरज आया मुर्गा बडबडाया / मुर्गी को जगाया बोला / महारानी ज़रा चाय तो पीला दे तू सुनाकर तालियाँ बटोरी। मनीषा आर्य सोनी ने मेहनतकश प्राणी की तुलना एक मेहनती आदमी से इस तरह की – बोझा ढोता सब कुछ सहता नहीं उधम मचाता है, हो जाता जब थककर चूर तब गर्दभ राग सुनाता है। कार्यक्रम समन्वयक राजाराम स्वर्णकार ने अपनी रचना –नई- नई स्कूटी थी, पीछे बैठी ब्यूटी थी / उसके नखरे-नाज उठाना जैसे मेरी ड्यूटी थी सुनाकर सभी को लौट-पौट कर दिया। कार्यक्रम में कैलाश टॉक, कवयित्री पम्मी कोचर ने “चुगली चाची और मक्खन मामा प्रभा प्रकाश कोचर ने “अप्रैल फूल ” में अप्रेल फूल बनाना हैं, बिना कली के हंसी का फूल खिलाना हैं सुनाई। कार्यक्रम में डॉ. नासिर जैदी, डॉ.बसन्ती हर्ष, जुगलकिशोर पुरोहित, लीलाधर सोनी, कृष्णा वर्मा, मधुरिमासिंह, कासिम बीकानेरी, मोहनलाल जांगिड़, ज्योति स्वामी, जगदीशदान बीठू, प्रो.नरसिंह बिंनानी और मोहम्मद शमीम ने अपनी रचनाओं से सभी को गुदगुदाया।
इससे पहले स्वागत उद्बोधन देते हुए नवकिरण सृजन मंच के अध्यक्ष डॉ. अजय जोशी ने बताया कि एक अप्रैल यानी वह दिन जब समझदार से समझदार आदमी भी दो बार सोचकर बात करता है। दुनिया भर में इसे अप्रैल फूल डे या मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी कड़ी में बीकानेर में भी हंसी-मजाक से ओत-प्रोत रचनाओं के इस कार्यक्रम की आवश्यकता महसूस की गई जो आज अपने नवमें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।कवियों की रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संस्कृतिकर्मी राजेन्द्र जोशी ने कहा हंसना स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है, सभी रचनाकारों ने अपनी रचनाओं इस कार्यक्रम की सार्थकता को सिद्ध किया। जोशी ने कहा इस आपा-धापी के युग में लोगों को हंसने की फुर्सत ही नहीं है। इस दिन हल्की-फुल्की शरारतें, मज़ाक और प्रैंक आम बात हैं। लेकिन परंपरा यही कहती है कि हंसी हो, दिल न दुखे वरना मज़ाक भी बेअदबी बन जाती है। डॉ. कृष्णा आचार्य ने अपनी टिप्पणी रखते हुए सभी रचनाकारों की रचनाओं को हंसी के साथ गंभीर बताया। उन्होंने अपनी रचना बलम म्हारो चतर हुयो, मोबाइल सूं बात करे / बलम हुशियार हुयो, दो-दो सिम सूं बात करे सुनाकर वाह-वाही लूंटी। कार्यक्रम का शानदार संचालन हास्य की फुल झड़ियाँ छोड़ते हुए बाबू बमचकरी ने किया। कार्यक्रम में कथाकार डॉ.अशफाक कादरी, वन्दे मातरम मंच के विजय कोचर, समाजसेवी ऋषिकुमार अग्रवाल, रामेश्वर बाडमेरा “साधक”, मधुसुदन सोनी, शिव दाधीच, वरिष्ठ रंगकर्मी बी एल नवीन, घनश्यामसिंह, हरिकिशन व्यास की गणमान्य उपस्थिति रही। नवकिरण सृजन मंच की तरफ से यामिनी जोशी ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।
