












बीकानेर, नवजात शिशुओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से बाल कल्याण समिति द्वारा ‘फैंके नहीं, हमें दें’ अभियान चलाया जाएगा। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने बुधवार को इसके पोस्टर का विमोचन किया।
इस दौरान मेघवाल ने कहा कि नवजात बच्चों को लावारिस स्थिति में छोड़ने की बजाय उन्हें सरकारी आश्रय अथवा रक्षा घरों में रखने के प्रति जागरूक करने का अभियान बेहद महत्त्वपूर्ण अभियान है। आमजन को इसके लिए जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों को लावारिस छोड़ना मानवीय दृष्टिकोण से बुरा कृत्य और अपराध है। उन्होंने कहा कि बाल कल्याण समिति निचले स्तर तक इसके प्रति जागरूकता पैदा करे और कानून सम्मत तरीकों से बच्चों को संरक्षित करें।
बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि कई बार ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जब माता-पिता अथवा अन्य परिजनों द्वारा नवजात बच्चों को असंवेदनशील तरीके से छोड़ देते हैं। इससे बच्चे शारीरिक रूप से अक्षम हो जाते हैं, जिससे उनका दत्तक ग्रहण नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि पालना गृह सहित अन्य व्यवस्थाओं के साथ ऐसा करने वालों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्यवाही को भी प्रचारित किया जाए।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष जुगल किशोर व्यास ने बताया कि समिति द्वारा ’फैंके नहीं, हमें दे’ अभियान असुरक्षित, झाड़ियों एवं नाले आदि में फैंके गए शिशुओं की रक्षा और आश्रय के लिए चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 1 वर्ष में जोधपुर, पाली, जयपुर, झालावाड़, भीलवाड़ा और बांसवाडा आदि स्थानों पर नवजात असुरक्षित तरीके से फैंके गए मिले। बीकानेर में भी एक-दो स्थानों पर ऐसी गतिविधियां देखने को मिली। कई बार असुरक्षित फैंके गए बच्चों की मृत्यु तक हो जाती है। जो कि मानवता को शर्मसार करता है। ऐसे बच्चों को सुरक्षित व संरक्षित कर दत्तक की प्रक्रिया में लाना अभियान की मुख्य मंशा है। उन्होंने बताया कि जिले के पीबीएम और जिला अस्पताल में इसे अभियान से जुड़े पोस्टर लगाए जाएंगे। वहीं ग्राम पंचायत स्तर तक इसके प्रति जागरूकता के प्रयास होंगे।
बाल कल्याण समिति के सदस्य जन्मेजय व्यास ने कहा कि लोगों में जागरूकता की कमी है कि नवजात शिशु नहीं रखने पर कार्यवाही हो जाती है और इसी कारण वे शिशुओं को असुरक्षित फेंक जाते है और रखना नहीं चाहते है। अभियान का उद्देश्य आम जन को जागरूक करना है, जिससे शिशुओं को पालना गृह या बाल कल्याण समिति या दत्तक ग्रहण एजेन्सी को सौंपते है तो उनके खिलाफ किसी प्रकार की कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होती है और नवजात शिशु भी सुरक्षित एवं संरक्षित रहते है।
बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक अरुण सिंह शेखावत ने कहा कि अभिभावक अपने अनचाहे शिशुओं को उचित व उपयुक्त स्थान पर रखें या उचित प्राधिकारी यथा बाल कल्याण समिति, दत्तक ग्रहण एजेन्सी, बाल अधिकारिता विभाग में जमा करवाएं।
बाल अधिकारिता विभाग के किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य अरविंद सिंह सैंगर ने बोर्ड से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी।
