











बीकानेर,नोखा विधायक सुशीला डूडी का कहना है कि सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। इस बजट में न तो मध्यम वर्ग और गरीब को कोई राहत दी गई है और न ही बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
किसानों की आय दोगुनी करने का वादा एक बार फिर केवल भाषणों तक सीमित रह गया है। कृषि क्षेत्र के लिए कोई ठोस योजना या पर्याप्त प्रावधान इस बजट में दिखाई नहीं देता। वहीं आर्थिक विकास को गति देने वाले पूंजीगत खर्चों में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई है, जो चिंता का विषय है।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में अपर्याप्त बजटीय आवंटन सरकार की असंवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। वहीं युवाओं के लिए रोजगार सृजन के प्रश्न पर भी बजट में कोई ठोस, दूरदर्शी और विश्वसनीय पहल दिखाई नहीं देती, जिससे बेरोजगारो के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। आयकर स्लैब में बड़े बदलाव न होने से वेतनभोगी वर्ग की निराशा बढ़ी है।
यह बजट आम जनता की जरूरतों और अपेक्षाओं को नजरअंदाज करता है, भाजपा सरकार की नीतियां केवल बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पाेरेट घरानो के हितों को लाभ पहुंचाने तक सीमित हैं, साथ ही अपने मंत्रियों की सैलेरी, राजकीय अतिथियों के मनोरंजन और पूर्व राज्यपालों जैसे खास खर्चों के लिए 1102 करोड़ रुपये दिए गए हैं जबकि पिछली बार के रिवाइज्ड एस्टीमेट 978.20 करोड़ रुपये से ज्यादा हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आम नागरिक की समस्याओं का समाधान इस बजट में कहीं दिखाई नहीं देता।
