












बीकानेर.राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ.मंजू बाघमार ने कहा कि साहित्य की सेवा ऐसा अनूठा अनुष्ठान है, जिससे समाज को नई दिशा और दृष्टि मिलती है। संपर्क साहित्य संस्थान द्वारा जयपुर के होटल होटल ग्रांड सफारी के शाही हॉल में आयोजित आठवें वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन में संस्था के महिला सशक्तीकरण के तहत किए गए कार्यों को रेखांकित करते हुए महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से महिलाओं को शक्ति और संबल मिलता है।
इस अवसर पर उन्होंने संस्थान की नवीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी का स्वागत किया और शपथ दिलाई। वार्षिकोत्सव के अवसर पर साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में दिए गए अवदान के लिए बीकानेर के साहित्यकार रवि पुरोहित और नवनीत पांडे सहित देश के 21 प्रतिष्ठित साहित्यकारों को ’संपर्क’ सम्मान से नवाजा गया। संपर्कश्री से समादृत रचनाकार रवि पुरोहित ने अपने उद्बोधन में कहा कि संास्कृतिक व सामाजिक सरोकारों को समर्पित इस तरह केअनुष्ठान पिछड़े, शोषित और जरूरतमंद लोगों के लिए रामबाण है और वे सामाजिक विकास की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए ऊर्जस्वित होंगे। संपर्क अर्पण के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए पुरोहित ने कहा कि सम्मान और पुरस्कार जहां रचनाकार की सामाजिक पहचान बनाते हैं, वहीं एक नवीन जिम्मेदारी और दायित्वबोध भी उसे सौंपते हैं। समारोह में बसंती पवार, डॉ. बसंत सिंह सोलंकी, गोविंद भारद्वाज, हरि प्रकाश राठी, हरिराम मीणा, हेमंत शेष, हितेश व्यास, मधु खंडेलवाल, रिजवान एजाजी, मनोज कुमार शर्मा, मीठेश निर्मोही, डॉ नवल किशोर, सुधा जुगराज, प्रेम आनंदकर, डॉ. सतीश कुमार और शिव कुमार शर्मा को सम्मानित किए गए।
कार्यक्रम अध्यक्ष रोजियम ग्रुप के चेयरमैन अर्पित जैन, हिन्दी प्रचार-प्रसार संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अखिल शुक्ला, शिक्षाविद् डॉ. ऋत्विज गौड़, संपर्क साहित्य संस्थान के अध्यक्ष अनिल लढ़ा एवं महासचिव रेनू शब्दमुखर ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
इस अवसर पर संस्थान अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। मुख्य संरक्षक डॉ. आरती भदोरिया ने स्वागत करते हुए संपर्क के सेव बेटी-सेफ बेटी अभियान की जानकारी दी। महासचिव रेनू शब्दमुखर ने संस्थान की आठ वर्षीय साहित्यिक यात्रा की विस्तृत चर्चा की।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अखिल शुक्ला ने साहित्य आंदोलन को इसी तरह आगे बढ़ाने का आह्वान किया। डॉ. ऋत्विज गौड़ ने साहित्य व शिक्षा के समन्वय से आगे बढ़ने एवं नवाचार की बात रखी। कार्यक्रम का संचालन विजयलक्ष्मी जांगिड़ एवं सीमा वालिया ने किया।
