













बीकानेर,भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसन्धान संस्थान अविकानगर के मरू क्षेत्रीय केंद्र बीकानेर का 53वा स्थापना दिवस किसान वैज्ञानिक संगोष्ठी के साथ मनाया गया। जिसमे मुख्यअतिथि डॉ अनिल कुमार पुनिया निदेशक राष्ट्रीय ऊट अनुसन्धान संस्थान बीकानेर, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ अरुण कुमार तोमर निदेशक अविकानगर संस्थान, विशिष्ट अतिथि सीएओ इंद्रभूषण कुमार एवं प्रभारी केंद्र निर्मला सैनी रहे । निर्मला सैनी द्वारा केंद्र द्वारा किसान के लिए की जा रही गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला l निदेशक डॉ अरुण कुमार द्वारा अपने संस्थान के साथ सभी केंद्र द्वारा पिछले वर्ष किये गये अच्छे कार्य के लिए सभी की प्रशंसा की एवं भविष्य मे भेड़पालन के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए किसानो को प्रशिक्षण के साथ जागरूकता पैदा करने का निवेदन किया l तथा उन्होंने बताया कि भेड़पालन को किसान के लिए एटीएम उपयोगिता को तोह हम अच्छे से किसान को समझा पाये । लेकिन अब उनको ये बताने की सख्त आवश्यकता है कि बकरीपालन की तुलना मे भेड़पालन मे भेड़ो की चराई करना आसान है व बकरी की तुलना मे भेड़ वजन मे जल्दी तैयार होती है एवं भेड़पालन मे भेड़ को बकरी क़ी उपेक्षा कम संसाधन मे भी पालकर बढ़िया वजन लिया जा सकता है । भेड़ का मेमना तीन महीने मे जो वजन लेता है वो बकरी का बच्चा पांच से छ महिने मे ले पाता है । मुख्यअतिथि द्वारा भी संस्थान के किसान हितेषी कार्य क़ी प्रशंसा की एवं बीकानेर क्षेत्र मे मिलकर कार्य करने का निवेदन किया । जिससे एक साथ किसान के दोनों पशुओ भेड़ एवं ऊट पर कार्य किया जा सके l उपरोक्त कार्यक्रम मे 80 से अधिक किसान लुकरणसर, कोटडी, गोलरी व गाढ़वाला से अनुसूचित जाति उपयोजना मे सम्मिलित होकर अपने विचार एवं समस्या पर विस्तार से संवाद वैज्ञानिको ओर किसानो के बीच हुआ l स्थापना दिवस के अवसर पर उर्मूल सीमांत समिति बज्जू एवं अविकानगर संस्थान के केंद्र के बीच ऊन की गुणवत्ता एवं उत्पाद विषय पर एमओयू किया । केंद्र के दो पब्लिकेशन “कृषक सफलता की कहानी” एवं “प्रसार पत्र” के फोल्डर का भी विमोचन कार्यक्रम के अतिथियों द्वारा किया गया । पधारे अतिथियो द्वारा केंद्र के प्रवेश द्वार का उद्धघाटन करते हुए कैंपस मे पोधेरोपण भी इस अवसर पर किया गया । एक्सटेंशन कार्यक्रम के सफल आयोजन मे डॉ विजय कुमार, डॉ आशीष चोपड़ा, डॉ अशोक कुमार, डॉ गोविन्द मकराना, डॉ चेतन पाटिल,देवीलाल मौर्य आदि द्वारा आवश्यक सहयोग किया गया । धन्यवाद ज्ञापन डॉ अशोक कुमार द्वारा दिया गया ।
