











बीकानेर,केन्द्रीय बजट 2026-27 देश में खेल व खिलाड़ियों को नई दिशा देने वाला बजट है। इस खेल बजट में खिलाड़ी, कोच और खेल उद्योग तीनों पर ध्यान दिया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 के बजट में खेल को बढ़ावा देने के लिए ‘खेलो इंडिया मिशन’ और खेल सामान के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये की घोषणा की। यह मिशन अगले 10 वर्षों में खेल प्रतिभाओं की पहचान करना, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और घरेलू खेल सामान उद्योग को मजबूत करेगा। केंद्रीय बजट में खेल को लेकर सरकार ने नूतन दृष्टि प्रदान की है जिससे अब ध्यान केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे खेल तंत्र को मजबूत किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खेल बजट से जुड़ी दो बड़ी घोषणाएं की जिसमें दस वर्षों की दिशा तय करने वाला ‘खेलो इंडिया मिशन’ तथा खेल-कूद के सामानों के निर्माण के लिए समर्पित एक पहल। खेलो इंडिया कार्यक्रम से खेल प्रतिभाओं को निखारने की पहल को आगे बढ़ाते हुए अगले दशक में खेल क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव करने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है। इस मिशन का मकसद अगले दशक में देशभर में प्रशिक्षण केंद्रों को गुणवत्तापूर्ण, प्रभावी एवं मजबूत करना और योग्य प्रशिक्षक तैयार करना है ताकि गांव-ढाणी से लेकर शहरों तक छिपी खेल प्रतिभाओं को सही समय पर पहचान कर आगे बढ़ाया जा सके। खेल बजट में पहली बार 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं वहीं खेल सामान के लिए एक समर्पित पहल का प्रस्ताव रखा है जिससे उपकरण डिजाइन के साथ-साथ सामग्री विज्ञान में विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा तथा घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार मिलने की आशा है। क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, फुटबॉल, वालीबॉल तथा जिम संबंधी उपकरण जैसे सामान अंतरराष्ट्रीय मानकों के तैयार हो सकेंगें। खेल का सामान बनाने वाली छोटी-छोटी फैक्ट्रियों और एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा जबकि आयात पर निर्भरता घटेगी वहीं निर्यात बढ़ेगा। भारत में बनने वाले खेल सामान की गुणवत्ता बेहतर होगी तो खिलाड़ियों को सस्ता एवं बेहतर सामान मिलेगा। युवाओं के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नये रोजगार सृजित होंगे। सरकार की इस घोषणा को भारत को ‘स्पोर्ट्स इक्विपमेंट हब’ बनाने की दिशा में अहम कदम माना जाना चाहिए। आगामी दस वर्षों में यह बजट खेल की तस्वीर बदल देगा। अब खिलाड़ी यूं ही भीड़ में नहीं खो जायेंगें बल्कि उनकी अपनी एक अलग पहचान बनेगी। फाउंडेशन लेवल पर छोटे शहरों और गांवों की शुरुआती प्रतिभायें, उभरते खिलाड़ी तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार होंगें अर्थात जिस खिलाड़ी में दम है, उसे समय पर सही ट्रेनिंग और मंच मिलेगा वहीं योग्य प्रशिक्षक ‘हाई-क्लास’ होंगें क्योंकि सरकार ने महसूस किया है कि सिर्फ खिलाड़ी नहीं, कोच, फिजियो, फिटनेस ट्रेनर और सपोर्ट स्टाफ भी उतने ही जरूरी हैं जितनी खिलाड़ियों की ट्रेनिंग जरुरी है। संक्षेप में कहे तो यह बजट खेल-खिलाड़ी क्षेत्र में नूतन दृष्टि प्रदान करने वाला है जिससे खेलो इंडिया मिशन को गति मिलेगी। प्रतिभावान खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और सस्ता खेल सामान उपलब्ध हो सकेगा।
