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बीकानेर,श्रीडूंगरगढ़,तेरापंथ युवक परिषद, श्रीडूंगरगढ़ के युवक एवं किशोर साथियों ने 12, 13 एवं 14 अप्रैल को लाडनूं में आयोजित त्रिदिवसीय उत्तरांचल स्तरीय युवा सम्मेलन में उत्साह एवं ऊर्जा के साथ सहभागिता निभाई।

सम्मेलन के दौरान सभी साथियों को आचार्य महाश्रमण जी व साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा जी के दर्शन का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। मंगल पाठ श्रवण से युवाओं ने आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित किया, जिससे जीवन में आगे बढ़ने, श्रेष्ठ कार्यकर्ता बनने एवं समाज सेवा के प्रति नई प्रेरणा मिली।

त्रिदिवसीय सत्रों में गुरुदेव के सान्निध्य में युवक परिषद् के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेश कुमार जी, किशोर मंडल से मुनि नय कुमार जी, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, एम.एस. बिट्टा, दिलीप जी बैद, अरविंद जी मांडोत सहित अनेक संतों एवं राष्ट्रीय अभातेयुप पदाधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इन सत्रों ने युवाओं को आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक नेतृत्व की दिशा में भी प्रेरित किया।

सम्मेलन में कुल 555 रजिस्ट्रेशन के बीच श्रीडूंगरगढ़ परिषद के युवाओं ने अपना परचम लहराया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रश्नोत्तरी में पीयूष बोथरा, अनुशासन में प्रदीप पुगलिया एवं भजन मंडली से सुमित बरडिया एवं युवाओं ने श्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर परिषद को गौरवान्वित किया।
परिषद की टीम ने कुल तीन पुरस्कार अपने नाम किए तथा 37 युवाओं की सक्रिय उपस्थिति भी विशेष रही।

सभी साथियों ने अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रबंध मंडल से संवाद किया एवं संगठनात्मक दृष्टि से नई दिशा एवं प्रेरणा प्राप्त की।

परिषद अध्यक्ष विक्रम मालू, मंत्री पीयूष बोथरा, संयोजक दीपक छाजेड़, किशोर मंडल संयोजक मुदित जी पुगलिया सहित समस्त टीम के नेतृत्व एवं समन्वय से यह सहभागिता अत्यंत सफल एवं प्रभावी रही।

परिषद के सदस्यों ने सभी सत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए संवाद, प्रश्नोत्तर, सुझाव एवं जिज्ञासा में उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई। भोजनालय व्यवस्था में भी युवाओं एवं किशोर साथियों ने सेवाएं देकर सराहनीय योगदान प्रस्तुत किया।

समग्र रूप से यह सम्मेलन युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं संस्कारपूर्ण रहा। उत्कृष्ट व्यवस्थाओं एवं अनुशासित वातावरण ने सभी प्रतिभागियों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव छोड़ा।

सम्मेलन में भाग लेने के लिए सभी युवा साध्वी श्री लक्ष्यप्रभा जी के आशीर्वाद एवं मंगल पाठ के साथ श्रीडूंगरगढ़ से रवाना हुए तथा वापसी पर भी मंगल पाठ श्रवण कर अपने आध्यात्मिक भाव को और अधिक प्रगाढ़ किया।

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