












बीकानेर,जयपुर,शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत 25 प्रतिशत निःशुल्क प्रवेश को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का संयुक्त अभिभावक संघ ने स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों का निजी स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित करना कोई विकल्प नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय मिशन” है और यह दायित्व राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा निजी विद्यालयों पर समान रूप से लागू होता है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को संविधान के अनुच्छेद 21A के साथ पढ़ा जाना चाहिए और इसके तहत निजी गैर-अनुदानित व विशेष श्रेणी के विद्यालयों को कक्षा 1 अथवा प्री-प्राइमरी स्तर पर 25 प्रतिशत बच्चों को अनिवार्य रूप से प्रवेश देना होगा। न्यायालय ने अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी करते हुए मामले को लंबित रखा है तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को भी पक्षकार बनाया है।
*संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा—* “सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उन सभी राज्य सरकारों और निजी स्कूल संचालकों के लिए करारा संदेश है, जो वर्षों से RTE के 25 प्रतिशत प्रवेश को जानबूझकर लटकाते आ रहे हैं। न्यायालय ने साफ कह दिया है कि कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों का प्रवेश कोई दया नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना राष्ट्रीय दायित्व है।”
*उन्होंने आगे कहा—* “राजस्थान सहित कई राज्यों में हजारों बच्चे महीनों से प्रवेश की प्रतीक्षा में हैं। निजी स्कूलों द्वारा बहानेबाजी, तकनीकी अड़चनें और विभागीय ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जा सकती। यदि अब भी आदेशों की अवहेलना होती है, तो संयुक्त अभिभावक संघ न्यायालय की अवमानना सहित हर संवैधानिक व कानूनी रास्ता अपनाएगा।”
*अभिषेक जैन बिट्टू ने यह भी कहा कि—* “सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि RTE का ईमानदार क्रियान्वयन ही सामाजिक समानता और शिक्षा में समान अवसर की नींव है। सरकारों को तुरंत लंबित प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए और निजी स्कूलों पर कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करनी चाहिए।”
संयुक्त अभिभावक संघ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की तत्काल और पूर्ण पालना कराते हुए सभी लंबित RTE प्रवेश शीघ्र पूरे किए जाएं, ताकि एक भी पात्र बच्चा शिक्षा के अपने मौलिक अधिकार से वंचित न रहे।
