बीकानेर,जयपुर। प्रदेश में स्कूलो को खोलने की तैयारियों पर जोरो पर चल रही, एक तरफ निजी स्कूल संचालक सरकार पर लगातार दबाव बना रहे है तो वही दूसरी तरफ राज्य सरकार भी स्कूलो के दबाव के चलते लगातार बैठकें आयोजित कर चर्चाएं कर रही है। स्कूलो को खोलने के संदर्भ में मुख्यमंत्री द्वारा गठित मंत्री समूह की समिति ने भी राज्य में स्कूलो को खोलने का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के पास अंतिम निर्णय के लिए भेज दिया है जिस पर कयास लगाए जा रहे है कि सरकार प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को लेकर 16 अगस्त से स्कूलो को निर्देश दे सकती है।

संयुक्त अभिभावक संघ ने स्कूलो को खोलने के संदर्भ में टिप्पणी करते हुए कहा कि अभिभावक भी चाहता है प्रदेश में स्कूल खुले पिछले डेढ़ सालों से स्कूल पूरी तरह से बन्द है जिससे बच्चों की शिक्षा पर बहुत ज़्यादा असर देखने को मिल रहा है किंतु इन सबके बावजूद शिक्षा की कोरोना से तुलना करना व्यर्थ है क्योंकि कोरोना बहुत ही गम्भीर संक्रमण है जिसको हल्के में लेने की भूल कभी नही की जा सकती है खासकर तब जब बच्चों का मामला सामने हो तो कोई भी परिवार बच्चों के ना स्वास्थ्य से समझौता कर सकता है जिंदगी से समझौता कर सकता है।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि राज्य सरकार स्कूलो को खोलने को लेकर बिल्कुल भी जल्दबाजी ना दर्शाएं, राज्य सरकार को इस मसले पर गंभीरता दिखाने की सख्त आवश्यकता है, निजी स्कूलों के दबाव में आकर फैसला लेना प्रदेश के विभिन्न परिवारों को खतरे में डालना हो सकता है।

अभिषेक जैन ने कहा कि देशभर के 13 राज्यों में अब तक स्कूल खोले जा चुके है जिसमें पांडुचेरी राज्य ने एक ही दिन में स्कूलो को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। इसके अतिरिक्त राज्यों की रिपोर्ट देखे तो पिछले 7 दिनों में पंजाब, हरियाणा, छतीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यो में 1200 से अधिक छात्र-छात्राएं कोरोना संक्रमित पाए गए है। कर्नाटक में 300 से अधिक विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसमे 0 से 9 वर्ष तक के 150 और 10 से 19 वर्ष तक के 200 विद्यार्थी शामिल है। ऐसे ही महाराष्ट्र के सोलापुर में 650, हरियाणा के फतेहाबाद में 10, छतीसगढ़ के जांजगीर में 50, पंजाब के लुधियाना में 20 से अधिक मामले सामने आए है। यह शुरुवाती और सरकारी आंकड़े है हकीकत देखने को मिलेगी तो यह आंकड़े 1200 से कही ज़्यादा नजर आएंगे। अगर बच्चों के मामलों में गम्भीरता नही बरती गई तो हालात बद से बदतर हो सकते है।

*मुख्यमंत्री सतर्कता का पाठ पढ़ाने के बजाए स्वयं पाठ पढ़े*

संघ प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता को कोरोना संक्रमण को लेकर नसीहतों का पाठ पढ़ा रहे है किंतु खुद पाठ पड़ने से तौबा कर रहे है। मुख्यमंत्री को खुद भी सर्तकता का पाठ पढ़ना चाहिए और अपने मंत्री मंडल को भी सतर्कता का पाठ पढ़ाना चाहिए। राज्य सरकार उन निर्दोष बच्चों की जिंदगी पर दांव लगा रही है जिनकी वेक्सिनेशन का कोई अता-पता तक नही है जबकि जिन लोगों का वेक्सिनेशन हो चुका है उन पर आज भी रोक और नियम बरकरार है। बेहतर होगा राज्य सरकार स्कूलो को खोलने के निर्णय से पहले 18 से ऊपर के छात्र-छात्राओं के लिए कॉलेज खोलने का निर्णय लेंवे।