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बीकानेर स्थित महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा ‘साहित्य में भारतीय संस्कृति’ विषय पर भव्य व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के संरक्षक और कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय साहित्य विश्व को मानवता और शांति का संदेश देने वाला सशक्त माध्यम है, जिसे नई पीढ़ी को गहराई से आत्मसात करना चाहिए। इस अवसर पर ओ. पी. तिवारी,विभागाध्यक्ष ,भीमराव अंबेडकर कॉलेज ,गंगानगर ने भी साहित्य की सामाजिक भूमिका पर अपने विचार साझा किए। स्वागत भाषण में विश्विद्यालय में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि समाज का जीवंत दर्पण है जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाता है।
मुख्य वक्ता प्रो. विकास शर्मा, मशहूर साहित्यकार, लेखक एवं विभागाध्यक्षक अंग्रेजी,चौधरी चरणसिंह यूनिवर्सिटी,मेरठ ने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि साहित्य ही वह सेतु है जो हमें आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों और नैतिक मूल्यों से जोड़े रखता है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. संतोष शेखावत ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अकादमिक आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और वैचारिक स्पष्टता के लिए अनिवार्य हैं। कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रगति सोबती ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया और आधुनिक वैश्विक युग में भारतीय नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर अपनी बात रखी।
इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक, डॉ. राजाराम चोयल, एसोसिएट प्रोफेसर,पर्यावरण डॉ. अनिल दुलार, डॉ. लीला कौर और डॉ. प्रभुदान चारण , डॉ यशवंत गहलोत,डॉ.मनोज बजाज की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में अतिथि व्याख्याता डॉ.नीतू बिस्सा, डॉ मुदित, डॉ हितेन्द्र मारु,
डॉ सपना ,डॉ.रिंकू,डॉ.नमामि शंकर आदि
रहे।
विद्यार्थियों में सुमन, गायत्री, रंजना, मोहित, अजय, टिया और राजेश मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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