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बीकानेर,पश्चिमी राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण को लेकर चल रहे जनआंदोलनों की श्रृंखला में एक अहम कड़ी जोड़ते हुए शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी आगामी 2 फ़रवरी को बीकानेर में आयोजित होने जा रहे ‘खेजड़ी बचाओ–प्रकृति बचाओ’ अभियान में शिरकत करेंगे। यह अभियान खेजड़ी वृक्ष, ओरण भूमि, गोचर और समग्र प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर से पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भाग लेने जा रहे हैं।

शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लंबे समय से खेजड़ी, ओरण और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने न केवल विधानसभा के पटल पर बल्कि सड़क से लेकर जनसभाओं तक, हर मंच पर इन विषयों को प्रभावी ढंग से उठाया है। पश्चिमी राजस्थान की पारिस्थितिकी में खेजड़ी वृक्ष की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए भाटी लगातार यह कहते रहे हैं कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन-तंत्र की रीढ़ है, जो जल संरक्षण, पशुपालन, जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका से सीधे जुड़ी हुई है।

विधायक भाटी का मानना है कि विकास की अंधी दौड़ में यदि पारंपरिक पर्यावरणीय संतुलन को नज़रअंदाज़ किया गया, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ेंगे। इसी दृष्टि से वे ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण को लेकर भी लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं। विधानसभा में उन्होंने कई अवसरों पर यह सवाल उठाया कि किस तरह ओरण भूमि का अतिक्रमण और व्यावसायिक उपयोग स्थानीय पर्यावरण और ग्रामीण समाज दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है।

बीकानेर में आयोजित होने वाला ‘खेजड़ी बचाओ–प्रकृति बचाओ’ अभियान इसी चेतना को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास है। इस कार्यक्रम में खेजड़ी कटान पर रोक, ओरण और गोचर भूमि की कानूनी सुरक्षा, तथा पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान को संरक्षित करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की भागीदारी से इस अभियान को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय सामाजिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाटी द्वारा समय-समय पर उठाई गई आवाज़ ने इन मुद्दों को केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राज्यस्तरीय बहस का विषय बनाया है। उनका यह रुख उन जनप्रतिनिधियों के लिए एक उदाहरण है, जो विकास के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण को भी समान महत्व देने की बात करते हैं।

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