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बीकानेर,स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अरुण कुमार पर एक बार फिर गम्भीर आरोप लगे है। पहले से ही वित्तीय अनियमित के मामले में जांच के दायरे में आए कुलपति प्रो अरुण कुमार के कार्यकाल में हुए अविष्कारों पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रो अरुण कुमार कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कार्यवाहक कुलपति व स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति हैं। विश्वविद्यालय ने पेटेंट के लिए पिछले सवा साल में 15 रजिस्ट्रेशन करवाएं जिनमे से 7 के अविष्कार करने वाली इनवेटर में प्रोफेसर अरुण कुमार व उनकी बेटी शौर्य के नाम है। सूत्रों की माने तो शौर्य ना तो इस विद्यालय की छात्रा है,ना कर्मचारी।शौर्य जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर से पीएचडी कर रही है। हालांकि इनमें दो आविष्कारों के पेटेंट के लिए रजिस्ट्रेशन दो अलग-अलग जगह किए गए हैं। शौर्य उत्तराखंड में रह रही है,ऐसे में बीकानेर में आविष्कारों में लगातार सक्रिय रहना संभव नहीं है। इसके बावजूद भी शौर्य को इनवर्टर टीमों में लिया गया है। प्रो अरुण कुमार व शौर्य खासकर उन इनवेटर टीमों में है जिनमें डॉ मंजीत कौर,डॉ वीके सिंह, डॉ पीके यादव, डॉ एसके यादव के नाम है। प्रो अरुण कुमार अरुण कुमार के खिलाफ शिकायतों पर राज्यपाल ने हाई पावर कमेटी बनाकर 15 दिन में रिपोर्ट भी मांग ली है। गौरतलब है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में प्रो अरुण कुमार पर वित्तीय अनियमितताओं और चाहतों को नियम विरोध फायदा देने को लेकर भी एक मामला चल रहा है। वही जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय में कार्यवाहक रहते हुए भी भर्ती निकलने व कर्मचारियों के तबादले करने को लेकर भी विवाद में आ गए है। हालांकि प्रो अरुण कुमार ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्होंने कोई गलत काम नही किया है। लेकिन बार बार विवादों में आने के चलते कुलपति के पद को लेकर सवाल जरूर खड़े हो रहे है।

 

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