












बीकानेर,जयपुर, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट दिनेश कुमार सैनी (डीके)का बीती रात आकस्मिक निधन हो गया। महानगर टाइम और दैनिक भास्कर सहित कई समाचार पत्रों में स्वतंत्र रूप से अपनी सेवाएं दे रहे डी.के. सैनी के अचानक चले जाने से पत्रकारिता जगत स्तब्ध है।
रोज़ की तरह दिनभर अपने साथी फोटोग्राफरों और पत्रकारों के साथ काम निपटाने के बाद रात में भोजन कर दिनेश ने पत्नी और बच्चों को पास ही हो रहे सत्संग में भेज दिया। लगभग ढाई बजे, जब पत्नी और बच्चे वापस लौटे, तो उन्होंने दिनेश का शव पंखे से लटका पाया।
दिनेश ने आत्महत्या क्यों की, इसकी कोई ठोस जानकारी अभी सामने नहीं आई है। पर यह भी सच है कि कोई भी व्यक्ति इतनी आसानी से अपनी जान नहीं देता। कोई न कोई ऐसी पीड़ा अवश्य रही होगी, जिसे वह न अपने दोस्तों से साझा कर सका और न ही अपने परिजनों से। किसी गहरी परेशानी ने ही उसे यह बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया होगा।
यह घटना इसलिए और भी अधिक चौंकाने वाली है, क्योंकि दिनेश हमेशा हंसमुख, मिलनसार और मददगार व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। वे अपने से बड़ों का सम्मान करते थे, साथियों के सुख-दुख में खड़े रहते थे और स्वभाव से मस्तमौला थे।
हाँ, काम को लेकर वह जरूर दबाव में रहते थे। फ्रीलांस पत्रकारिता अपने आप में संघर्षपूर्ण होती है—मानसिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और भविष्य की चिंता लगातार बनी रहती है। लेकिन दिनेश संघर्षशील व्यक्ति थे, ऐसे हालात से टूट जाने वाले नहीं लगते थे। यही कारण है कि हर कोई इस घटना से हैरान है और मानता है कि कोई बड़ा कारण अवश्य रहा होगा।
अपनी तीनों बेटियों से उन्हें अपार प्रेम था। वे बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने देते थे। कम से कम अपनी बेटियों की ओर देखकर तो वे रुक जाते—ऐसा हर किसी के मन में सवाल उठ रहा है। जीवन में संघर्ष तो सबके होते हैं, उनसे लड़ा जा सकता है। दोस्तों से, सीनियर्स से बात की जा सकती है, कोई न कोई समाधान निकल सकता है। लेकिन चले जाने से समस्या का समाधान नहीं हुआ, बल्कि जिनके लिए वह समस्या थी, वह और अधिक असहनीय हो गई।
माता-पिता का सहारा चला गया, पत्नी का जीवनसाथी और तीन बेटियों का पिता उन्हें असहाय छोड़ गया। आत्महत्या के कारणों की जांच पुलिस करेगी, लेकिन जिस तरह के हालात अब परिवार—पत्नी और तीनों बच्चियों—के सामने खड़े हो गए हैं, वे वाकई चिंताजनक और हृदयविदारक हैं।
ईश्वर दिनेश भाई की पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
