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बीकानेर,राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित,आकाशवाणी की लोकप्रिय वरिष्ठ लोक गायिका राजकुमारी मारु का सुबह 9:30 बजे निधन हो गया । वे 80 वर्ष की थी । मारु पति, पुत्रों, पुत्री,नाती पोत्रो सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गई है ।
उनके निज निवास हंसा गेस्ट हाऊस के सामने नोखा रोड नई लाईन गंगाशहर से रवाना हुई अंतिम यात्रा में संगीतज्ञ ज्ञानेश्वर सोनी, वरिष्ठ लेखक अशफ़ाक कादरी, कवि कथाकार राजाराम स्वर्णकार फिल्मकार प्रदीप मारु, फोटो पत्रकार अज़ीज़ भुट्टा, नगर आर्य समाज के प्रधान महेश आर्य, श्री संगीत भारती के निदेशक कनय शर्मा, रमेश मारु, लालचंद मारु, महावीर सेन, मनोज सेन रामेश्वर सेन सहित गणमान्य,शामिल थे। नागरिक परिषद मुक्तिधाम नोखा रोड गंगाशहर में श्रीमती मारु का अंतिम संस्कार किया गया।
राजकुमारी मारु संगीत की समर्पित साधिका
शिक्षाविद सेवानिवृत्त वरिष्ठ अध्यापिका राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित राजकुमारी मारु का जन्म 15 अक्टूबर, 1945 को बीकानेर में बाबूलाल मारू के यहां हुआ। मारु ने एम. ए. (हिन्दी, संस्कृत), बी. एड. संगीत विशारद, संगीत भास्कर की उपाधियां प्राप्त की। वे शिक्षा विभाग, राजस्थान से व्याख्याता पद से सेवा निवृत हुई ।
वे आजीवन संगीत भारती, बीकानेर से जुड़ी रही । संगीत मनीषी डॉ. जयचन्द्र शर्मा, डॉ. रामेश्वर ‘आनन्द’ सोनी, डॉ. मुरारी शर्मा को संगीत गुरु मानती थी वरिष्ठ लोक गायिका राजकुमारी मारू के ओश्री मोहनलाल मारु । मारु आकाशवाणी की “बी-.हाई ग्रेड” कलाकार थी । मारु के पारम्परिक लोकगीत मंचो ,टी.वी. एवं आकाशवाणी से समय-समय पर प्रसारित होते रहे हैं। उनकी भक्ति रचनाओं की सीडी “भैरूं मतवाला, राम रूणीचे वाला, अंजनी भजन माला लोकप्रिय हुई है।
राजकुमारी मारु राजस्थान राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड की समर्पित गाइडर थी तथा सहायक लीडर ट्रैनर के रूप में स्काउट गाइड प्रशिक्षण शिविरों में सेवाएं प्रदान कर चुकी । मानवीय गुणों से समृद्धशाली, शांत स्वभाव की धनी विदुषी को भारत के राष्ट्रपति शंकरदयालजी शर्मा द्वारा 1993 में राष्ट्रपति पुरस्कृत किया गया।  मारु दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा राजधानी नई दिल्ली में सम्मानित किया गया।
मारु को उनकी संगीत साधना के लिए राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर द्वारा अकादमी अवार्ड पुरस्कार एवं कला पुरोधा सम्मान 2022-23 से सम्मानित किया गया । राव बीकाजी संस्थान बीकानेर द्वारा करणी माता सम्मान 2002,, बीकाणा अवार्ड, जेवियर अवार्ड, गोपाल गोस्वामी पुरस्कार और अल्लाह जिलाई बाई अवॉर्ड सहित अनेक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर आपकी साधना को सम्मानित कर गर्वित हुई है। मारु की दो पुस्तकों “निर्गुण ‘आनन्द’ भजनावली”, एवं “मोहन मुरारी भजन संग्रह” का लोकार्पण कुछ महीनों पूर्व किया गया।

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