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  • बीकानेर, गणतंत्र दिवस परेड में सेना के मार्च करने वाले दलों ने आजादी के बाद से भारतीय सेना की वर्दी और राइफल में आए बदलावों को प्रदर्शित किया।आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत सेना के तीन मार्चिंग दलों ने सेना की पिछले दशकों की वर्दी पहनकर उस समय की राइफलों के साथ परेड की। वहीं, एक दल ने नई लड़ाकू वर्दी पहनकर नवीनतम टेवोर राइफल प्रदर्शित की। इस बार गणतंत्र दिवस परेड में सेना के छह मार्च दलों ने हिस्सा लिया।

कोरोना के चलते 96 जवान शामिल हुए
कोविड प्रोटोकॉल के पालन के लिए हर दल में 144 के बजाय 96 जवान शामिल किए गए थे। राजपूत रेजिमेंट के जवानों की सेना की पहली टुकड़ी ने 1950 के दशक की वर्दी पहनकर .303 राइफल का प्रदर्शन किया। वहीं, दूसरे दल में असम रेजिमेंट के जवान शामिल थे, जो 1960 के दशक की सैन्य वर्दी में .303 राइफल थामे मार्च करते दिखे। 1970 के दशक की वर्दी के साथ 7.62 एमएम की सेल्फ-लोडिंग राइफल की झलक तीसरे दल में शामिल जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेन्ट्री रेजिमेंट के जवानों ने दी।

चौथा व पांचवां मार्चिंग दल क्रमश: सिख लाइट इन्फेन्ट्री और सेना आयुध कोर रेजिमेंट का था। उन्होंने 5.56 एमएम की इंसास राइफल के साथ सेना की मौजूदा वर्दी प्रदर्शित की। छठा दल टेवोर राइफल थामे पैराशूट रेजिमेंट के जवानों का था, जिन्होंने नई लड़ाकू वर्दी पहन रखी थी। इस वर्दी को जनवरी की शुरुआत में ही सामने लाया गया था। परेड में कुल 14 मार्चिंग दलों ने शिरकत की। इनमें से छह दल सेना के थे, जबकि एक दल वायुसेना, एक नौसेना, चार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), दो राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), एक दिल्ली पुलिस और एक राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) का था।

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