बीकानेर, राज्य सरकार द्वारा खेमराज चौधरी , सेवानिवृत आई.ए.एस. की अध्यक्षता में कर्मचारी व अधिकारी संवर्ग की मांगो के परीक्षण तथा केन्द्र सरकार एवं अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं से तुलनात्मक अध्ययन व विश्लेषण हेतु समिति का गठन किया गया है  उक्त समिति गठन का राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ पुरजोर विरोध करता है । राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष श्री विजय सिंह ने बताया कि उक्त समिति कर्मचारी संगठनों को भ्रमित करने एवं कर्मचारियों की जायज मांगो को टालने का एक प्रयास है । इससे पूर्व भी राज्य सरकार द्वारा विभिन्न समितियों का गठन किया गया जिनके प्रतिवेदन सचिवालय में धुल फांक रहे है । राज्य सरकार द्वारा 2017-18 में पूर्व मुख्य सचिव श्री डी.सी. सामन्त की अध्यक्षता में वेतन विसंगति निवारण समिति का गठन किया गया जिसके प्रतिवेदन का परीक्षण वित्त नियम विभाग 3 वर्ष पूर्ण होने के पश्चात् भी नहीं कर पाया गया । श्री गोविन्द शर्मा , पूर्व वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफराशों पर किये गये वेतन वृद्धि के आदेशों को राज्य सरकार द्वारा स्वयं ही विधि विरुद्ध बता कर समी संवर्गों के कार्मिकों की वसूलियों की जा रही है । ऐसी स्थिति में राज्य कर्मचारियों को समितियों से विश्वास समाप्त हो गया हैं । श्री विजय सिंह द्वारा राज्य सरकार से अविलम्ब उक्त समिति गठन का आदेश निरस्त कर समस्त संवर्गों के संगठनों से सीधी वार्ता कर समस्त विसंगतियों का निवारण करने की मांग की गई साथ ही सातवें वेतन आयोग के लागू होने के पश्चात भी भत्ते रिवाइज न किये जाने के फलस्वरूप भत्ते पुनर्निधारित करने एवं सामंत समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की गई । श्री सिंह से बताया कि यदि सरकार उक्त आदेशों को निरस्त नही करती है तो महासंघ द्वारा उक्त आदेश की होली जलाई जावेंगी ।