











बीकानेर,वरिष्ठ साहित्यकार देवकिशन राजपुरोहित के राजस्थानी कहानी संग्रह ‘दो घूँट पाणी’ का विमोचन समारोह रविवार को सर्किट हाउस में आयोजित हुआ।
पब्लिक रिलेशंस एंड एलाइड सर्विसेज एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (प्रसार) की ओर से आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जीएल शर्मा थे। उन्होंने कहा कि ‘दो घूँट पाणी’ सामाजिक ताने-बाने से उपजी कहानियां हमारे हैं। राजस्थान में पानी सबसे अनमोल है। राजपुरोहित इसके संरक्षण के प्रति जागरूक करते हैं। समाज को सीख देते हैं। उन्होंने कहा कि राजपुरोहित ने राजस्थानी सृजन को नए आयाम दिए हैं। युवा साहित्यकारों को इससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
श्याम सुंदर पंचारिया ने कहा कि साहित्य को समाज का दर्पण माना जाता है। देवकिशन राजपुरोहित ने साहित्यकार के रूप में समाज को दिशा दिखाने का कार्य किया है।
अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र जोशी ने की। उन्होंने कहा कि राजपुरोहित की कहानियां अनुभव से उपजी कहानियां हैं। इनमें लोकाचार है। सामाजिक समस्याओं का चित्रण है, तो उनका समाधान भी सुझाया है। उन्होंने कहा कि राजपुरोहित धुरंधर लेखक होने के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी विशेष पहचान रखते हैं।
कर्मचारी नेता महेश व्यास ने कहा कि देवकिशन राजपुरोहित पिछले छह-सात दशकों से राजस्थानी साहित्य सृजन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि राजपुरोहित की कहानियां हमारे चारों ओर बिखरी कहानियां हैं, जो हमें सीख देती हैं।
युवा शिक्षाविद उपेंद्र शर्मा ने कहा कि राजस्थानी का लिखित साहित्य बेहद समृद्ध है। राजपुरोहित जैसे साहित्यकारों ने इसे और मजबूत किया है।
स्वागताध्यक्ष हेमा राम जोशी ने देवकिशन राजपुरोहित के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजपुरोहित की साहित्यिक योगदान की जानकारी भी दी।
प्रसार के प्रदेश अध्यक्ष और जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक हरि शंकर आचार्य ने स्वागत उद्बोधन दिया। प्रसार की गतिविधियों के बारे में बताया।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एड. जुगल किशोर व्यास ने कहा कि राजपुरोहित की साहित्य साधना आमजन के लिए प्रेरणादाई है। अवर फॉर नेशन के सीए सुधीश शर्मा ने स्वच्छता की मुहीम के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन गोपाल जोशी ने किया। दिलीप सिंह आडसर ने आभार जताया।
इस दौरान घनश्याम जोशी, पर्यटन अधिकारी पवन शर्मा, निशांत शर्मा, वीरेंद्र राजपुरोहित, निशिकांत उपाध्याय, चैन सिंह राजपुरोहित, रवींद्र जाजड़ा, महेंद्र ढाका, प्रहलाद जोशी, महादेव उपाध्याय, बिरजू, राजा राजपुरोहित, जुगल उपाध्याय और टीनू शर्मा आदि मौजूद रहे।
