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बीकानेर,मातृ पितृ पूजन दिवस को समर्पित राष्ट्रीय कवि चौपाल की 554 वीं कड़ी आज के कार्यक्रम अध्यक्षता में सरदार अली परिहार, मुख्य अतिथि में पार्वती सरवाडि़या मास्टर – शेफ 2026 में टाप टेन व डॉ हरिदास हर्ष, विशिष्ट अतिथि में सुनीलदत्त नांगल (बैंक कर्मचारी नेता एवं संगीत कला के.कुमार आहूजा पत्रकार एवं रंगकर्मी मंचासीन हुए .. कार्यक्रम शुभारंभ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि *हम पाश्चात्य संस्कृति के आदि तो नहीं है जो वेलेन्टाइन डे में विवेक को रहन रखें, हम श्रोत्रिय संतों पर कायल हैं*

डॉ हरिदास हर्ष : आत्म यथार्थ समझा जाए तो एक मात्र माता पिता ही संतान के प्रेरणा स्रोत है… सरदार अली परिहार : अन्य की उपलब्धि सिद्धि पर हमें केवल सकारात्मक भावनाओं की परवरिश करनी चाहिए… पार्वती सरवाडि़या : कला कला ही होती है और उसकी साधना हमारे सिद्धि का सफर कराएं देती है … सुनील दत्त नांगल : संगीत न केवल साहित्य अंग है अपितु संगीत रोगों का इलाज के साथ आध्यात्मिक साधना भी है … के कुमार आहूजा : साहित्य का सान्निध्य माता-पिता के हितेशी आशीर्वाद जैसा है
सरोज भाटी : नारी चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकती हमें युवा पार्वती सरवाडि़या के मास्टर शेफ के टाप टेन पर गर्व है, इससे पूर्व लीलाधर सोनी ने मां सरस्वती वंदना की

रामेश्वर साधक : माता-पिता सेवा में कौनसी कृति श्रवण से नवीन है, हे कोई माई का लाल जो कहदे कि वो माता-पिता की सेवा में प्रवीण है,.. हिमांग सोनी : मुझे मां का सान्निध्य भगवान से विशेष लाभान्वित किया हैं,.. राजेन्द्र स्वर्णकार : अम्मा धरती रूप है बाबूजी आकाश !… राजकुमार ग्रोवर : जग में सारे रिश्ते झूठे, इक सच्चा रिश्ता माँ का … वो ही मेरी प्रथम गुरु है,इसीलिए भगवन से पहले माँ प्रमोद कुमार शर्मा तू जो कहता सखा मेरे तो दिखला देता दिल को चीर, हाय पुरानी पीर!!… कैलाश टाक : पिता बराबर नर नहीं, मां बराबर नारी, माता पिता ही जीवन है, बाकी दुनियादारी … शिव दाधिच बीकानेरी : हाथ पकड़कर चला पिता तो, तिल तिल सीढ़ी चलपाया, .. नरसिंह भाटी : मेरे माता पिता का कोई विकल्प नहीं, मेरे माता पिता महान है।

इसी बीच *” लपार्वती सरवाडि़या”,. सुनीलदत्त नांगल,… व के.कुमार आहूजा का “राष्ट्रीय कवि चौपाल में शाॅल, श्रीफल, माल्यार्पण, द्वारा सम्मान किया गया”*

पम्मी कोचर आचार्य : सब कुछ था दमेरे पास पर मै अभाव में ही जीती रही। बदल सकने को बहुत कुछ था, पर मैं स्वभाव में ही जीती रही,… लीलाधर सोनी : नैणा सूं दूर ना होइजो म्हारी मिजाजण नार,… प्रभा कोचर : यह सच है कि माँ के कदमों में स्वर्ग होता है, पर माँ की जन्नत भी तो वस करती संतान मे
ललित सरवाडि़या : हम नकारात्मक नहीं रहें, कब हमारे कला के प्रारब्ध संस्कार जाग जाएं,… शमीम अहमद शमीम : मम्मी का प्यार जन्नत की हवा,पापा का प्यार हिम्मत की दवा,… पवन चड्ढ़ा मां मुझे अपने आंचल में छिपा ले,.. कृष्णा वर्मा मां बाप से बढ़कर कोई दुनिया में नहीं खजाना,.. मधुरिमा सिंह : हाय हाय रे ये बिमारी कैंसर मानसिक रूप से पड़ रही भारी… कासिम बीकानेरी ने आज की सम्मानित प्रतिभाओं बधाई दी, तुलसी राम मोदी ने आभार व्यक्त किया जबकि कार्यक्रम का संचालन दार्शनिक भाव में रामेश्वर साधक ने किया

आज के कार्यक्रम में घनश्याम सौलंकी, तुलसी राम मोदी, कैलाश दान चारण, ,छोटू खां, मेहबूब अली देशनोक, घनश्याम सौलंकी, हनी कोचर, सैयद अख्तर, पृथ्वीराज सोनी, सिराजुद्दीन अभुट्टा, निर्मल कुमार सोनी राजिंदर सिंह संधु, हिमांग सोनी, गिरी राज बागड़ी, लक्ष्मी कांत सोनी, शिव प्रकाश शर्मा, ललित कुमार सोनी, लोकेश हेमकार आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे
जय साहित्य जय साहित्यकार

 

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