













बीकानेर,जयपुर। संयुक्त अभिभावक संघ ने निजी स्कूलों में बढ़ती मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संघ का कहना है कि पहले जहां फीस के नाम पर अभिभावकों से अत्यधिक वसूली की जाती थी, वहीं अब किताब, कॉपी, ड्रेस एवं स्टेशनरी के नाम पर भी संगठित रूप से लूट का खेल जारी है।
संघ के अनुसार सरकार द्वारा निजी स्कूलों को किताब-कॉपी खरीदने के लिए कम से कम 5 वेंडर की सूची देने का प्रावधान किया गया है, साथ ही अभी हाल ही में 1 अप्रैल को शिक्षा निदेशक सीताराम जाट से समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर ब्लॉक स्तर पर 3 सदस्यीय कमेटी का गठन कर निजी स्कूलों की जांच करने तक के आदेश दिए हुए है ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
*जमीनी हकीकत (Ground Reality)*
* स्कूल अपने “फिक्स” वेंडरों को ही सूची में शामिल करते हैं
* सभी वेंडरों पर एक जैसी महंगी किताबें उपलब्ध रहती हैं
* अभिभावकों के पास वास्तविक विकल्प नहीं बचता
* कमीशन आधारित सिस्टम पहले की तरह जारी है
*प्राइस रियलिटी चेक (एक छात्र पर खर्च)*
* NCERT किताबें: ₹300 – ₹1500
* प्राइवेट पब्लिशर किताबें: ₹4000 – ₹8000
* कॉपी/स्टेशनरी: ₹2500 – ₹5000
* यूनिफॉर्म (अनिवार्य वेंडर): ₹2000 – ₹7000
* फीस के अतिरिक्त कुल खर्च (प्राइवेट सिस्टम): ₹10,000 – ₹20,000+
* कुल खर्च (NCERT सिस्टम): ₹2000 – ₹5000
*प्रमुख खामियां*
* शिक्षा विभाग के पास औचक निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था का अभाव
* शिकायत के लिए कोई मजबूत केंद्रीकृत सिस्टम नहीं
* अभिभावक डर के कारण शिकायत करने से बचते हैं
* शिकायत करने पर बच्चों को टारगेट किए जाने की आशंका
*समाधान के सुझाव*
* सभी निजी स्कूलों में NCERT पाठ्यपुस्तकों को अनिवार्य किया जाए
* अभिभावकों को ओपन मार्केट से खरीदने की पूर्ण स्वतंत्रता मिले
* वेंडर एवं पब्लिशर पर स्कूलों का नियंत्रण समाप्त किया जाए
* शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के साथ अभिभावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
*निष्कर्ष*
संघ का कहना है कि “5 वेंडर” नीति केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और यह अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। जब तक पारदर्शिता, सख्ती और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक अभिभावकों को किसी प्रकार की वास्तविक राहत नहीं मिल पाएगी।
*संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा—* “प्रदेशभर में निजी स्कूलों द्वारा सुनियोजित तरीके से किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। सरकार की ‘5 वेंडर’ नीति पूरी तरह विफल साबित हो रही है, क्योंकि सभी वेंडर स्कूलों के प्रभाव में काम करते हैं। जब तक सरकार सख्त नियम बनाकर NCERT किताबों को अनिवार्य नहीं करती और ओपन मार्केट व्यवस्था लागू नहीं करती, तब तक यह लूट बंद होना संभव नहीं है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा।”
